हिसार- केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हरियाणा प्रदेश में चलाए जा रहे विशेष राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार द्वारा बुधवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू), हिसार के इंदिरा गांधी सभागार में “किसान यात्रा एवं पशुधन संवर्धन सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए किसानों, पशुपालकों, प्रगतिशील कृषकों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा सरकार के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा रहे, जबकि नलवा विधायक रणधीर पनिहार एवं हिसार के महापौर प्रवीण पोपली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता लुवास के कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा ने की। इस अवसर पर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डॉ. बी.आर. कम्बोज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि रणबीर गंगवा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा केंद्र एवं हरियाणा सरकार किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए अनेक जनहितकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पशुधन बीमा, डेयरी विकास, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और स्वरोजगार आधारित योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक पशु प्रबंधन, संतुलित पशु आहार, आधुनिक तकनीकों तथा उन्नत नस्लों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए विज्ञान आधारित दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।
कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन को राष्ट्रीय आवश्यकता बताते हुए किसानों एवं पशुपालकों से श्रेष्ठ पशुओं के प्रजनन को बढ़ावा देने तथा वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से हरियाणा को पशुधन विकास एवं नस्ल संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है। विश्वविद्यालय द्वारा किसानों और पशुपालकों के हित में किए जा रहे अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं विस्तार कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन ग्रामीण क्षेत्रों तक नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों एवं सरकारी योजनाओं को पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने “समृद्ध पशुधन, समृद्ध किसान, समृद्ध हरियाणा” का नारा देते हुए पशुधन विकास एवं स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए सभी की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि एवं नलवा विधायक रणधीर पनिहार ने कहा कि पशुपालन आज किसानों की आय बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने किसानों एवं पशुपालकों से विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान आधारित सुझावों एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पशुधन क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं तथा वैज्ञानिक पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लुवास के कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय पशुपालन एवं पशु विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाना तथा पशुपालकों को नवीनतम ज्ञान एवं तकनीकों से जोड़ना विश्वविद्यालय की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, नस्ल सुधार, संतुलित पशु आहार, दुग्ध उत्पादन वृद्धि, रोग नियंत्रण तथा पशुधन आधारित उद्यमिता के क्षेत्र में अनेक अनुसंधान एवं जनहितकारी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
प्रो. वर्मा ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की सफलता का वास्तविक मापदंड केवल उसके शोध पत्र अथवा अकादमिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि किसानों एवं पशुपालकों के जीवन में आने वाला सकारात्मक परिवर्तन होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रयोगशालाओं में विकसित ज्ञान एवं तकनीकों को खेतों और पशुशालाओं तक पहुंचाकर ग्रामीण समाज के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में सार्थक योगदान देना है। उन्होंने किसानों से विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ सेवाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं वैज्ञानिक सलाह का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
एचएयू के कुलपति डॉ. बी.आर. कम्बोज ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दो महत्वपूर्ण आधारशिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वित उपयोग से किसानों की आय में वृद्धि तथा ग्रामीण विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने किसानों से अनुसंधान आधारित तकनीकों को अपनाने तथा विश्वविद्यालयों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही विशेषज्ञ सेवाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
हिसार के महापौर प्रवीण पोपली ने कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पशुधन की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने उन्नत नस्लों के विकास, संतुलित पशु पोषण तथा आधुनिक डेयरी प्रबंधन तकनीकों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए किसानों को नवाचार आधारित पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने आधुनिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, रोग नियंत्रण, उन्नत नस्ल विकास, दुग्ध उत्पादन वृद्धि, पशुधन संवर्धन तथा पशुधन आधारित उद्यमिता से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियां साझा कीं। साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न किसान एवं पशुपालक हितैषी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों एवं पशुपालकों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।
इस अवसर पर कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रगतिशील किसानों एवं पशुपालकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सुनील (गोरची), सुमित्रा (मंगाली),राम मेहर ( घिराय),सुमित बूरा (घिराय), विजय मोर (मदनहेड़ी), राम निवास (पेटवार),सुरेन्द्र (कोथ कलां),ईश्वर सिंह (सिंघवा खास), अशोक (सिंघवा खास),शिव कुमार (बालक),धर्मबीर जांगड़ा (जुगलान) तथा बाबा फुल्ला साध गौशाला समिति, गांव कापड़ो के प्रतिनिधि शामिल रहे। अतिथियों ने इन सभी सम्मानित किसानों एवं पशुपालकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसान ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में लुवास के कुलसचिव डॉ. आर.एन. चौधरी ने सभी अतिथियों, किसानों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम की सफलता में सहयोग देने वाले सभी विभागों एवं अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पशुचिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश खुराना सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में किसान एवं पशुपालक उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन किसानों एवं पशुपालकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं से जोड़ने का एक प्रभावी मंच सिद्ध हुआ तथा कृषि एवं पशुधन विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया।