होशियारपुर:- दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रोशन ग्राउंड होशियारपुर में 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक चल रही श्रीमद् भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के अंतिम दिन में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या विश्व विख्यात भागवत भास्कर साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने बहुत ही सुसज्जित ढंग से भगवान श्रीकृष्ण जी के अलौकिक एवं महान व्यक्तित्व के पहलुओं से अवगत करवाया।
रुक्मिणी विवाह प्रसंग के माध्यम से सीख मिलती है कि प्रभु उस आत्मा का वरण करते हैं, जिसमें उन्हें प्राप्त करने की सच्ची जिज्ञासा हो।
भौमासुर राक्षस की कैद में सोलह हजार राजकुमारियाँ बंदी थीं। उन्होंने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण जी को अपनी रक्षा के लिए पुकारा। इधर इंद्रदेव ने द्वारिका जाकर प्रभु को भौमासुर के कुकृत्यों के विषय में बताया कि उसने अदिति माता के कुंडल, देवताओं का छत्र और सोलह हजार नारियों को चुरा लिया है।
प्रभु यह सब सुनकर एक ही निर्णय लेते हैं कि मैं प्रत्येक वस्तु चुराने के लिए उस राक्षस को क्षमा कर सकता हूँ, परंतु नारी का अपमान मैं सहन नहीं कर सकता। यही कारण था कि प्रभु और भौमासुर के बीच घमासान युद्ध हुआ। राक्षस मारा गया और सोलह हजार नारियों को उसकी कैद से मुक्त करवाया गया।
समाज में उनकी पुनः प्रतिष्ठा हेतु प्रभु ने नवयुवकों का आह्वान किया, पर किसी को भी आगे बढ़ता न देखकर स्वयं उन्हें अपना नाम दिया। क्योंकि भगवान जानते थे कि समाज में नारी की क्या स्थिति होनी चाहिए।
कहा जाता है कि किसी राष्ट्र की स्थिति जाननी हो तो वहाँ नारी का कैसा दर्जा है, उससे अनुमान लगाया जा सकता है। जिस स्थान पर नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं।
नारी नेतृत्व करने वाली, महिला जो पूजा के योग्य है, स्त्री जो प्रेम और सद्भावना का विस्तार करती है—ऐसा माना गया है। अर्जुन, अभिमन्यु, प्रताप, शिवाजी के चरित्र पढ़िए, उनमें असाधारण वीरता थी। वे वीर अपनी माता के उदर से ही महान संस्कार लेकर उत्पन्न हुए थे।
माताओं की पवित्र एवं उच्च भावनाओं का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। ध्रुव और प्रह्लाद में जो अद्भुत भक्ति बल था, वह उनकी माताओं के संस्कारों का ही प्रभाव था। मदालसा देवी जब अपने पुत्रों को पालने में सुलाती थीं, तब उन्हें आध्यात्मिक भावनाओं से पूर्ण लोरियाँ सुनाती थीं।
झांसी की रानी, ताराबाई, रानी कर्णावती, गार्गी, अपाला, घोषा आदि महान नारियों को भारत का इतिहास कभी नहीं भूल सकता।
परंतु आज की सदी में जहाँ विज्ञान और कंप्यूटर का युग है, वहाँ नारियों को माँ की कोख में ही मार दिया जाता है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी भयंकर बीमारी आज हमारे पूरे समाज में फैल चुकी है।
नवरात्रों के दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूप के रूप में जिन कन्याओं को हम पूजते हैं, उसी माँ के स्वरूप को अपने घर में आने से पहले ही मार देते हैं। हम विद्या के लिए देवी सरस्वती, शक्ति के लिए देवी दुर्गा और धन के लिए देवी लक्ष्मी का पूजन करते हैं—क्या ये सब नारियाँ नहीं हैं?
आज हमें अपनी रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। नारी को आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर दें। नारी को भी अपनी आत्मरक्षा के लिए अपने भीतर की सोई हुई शक्तियों से परिचित होना होगा। यह मात्र ब्रह्मज्ञान से ही संभव है।
कथा की शुरुआत मुख्य यजमान मनीष गुप्ता ( बिल्ला ब्रिक्स), कुशा गुप्ता,राहुल गुप्ता , भारत भूषण गुप्ता, राजीव अग्रवाल, रॉबिन, भरत महाजन, जी ने परिवार सहित भागवत पूजन कर की।
कथा में विशेष रूप में डा.राज कुमार ( सांसद), इंद्रपाल धन्ना(चीफ इन्फोर्मेशन कमिश्नर ), विजय सांपला ( पूर्व एस सी कमीशन चेयरमैन), संजीव तलवाड़ (पूर्व पार्षद),नीति तलवाड़ ( पूर्व पार्षद), यामिनी गोमर( सांसद कैंडिडेट), गोपाल अग्रवाल एन के बी के), चरणजीत कालरा, आशीष गोयल, मनोज, कमलजीत कटारिया पूर्व पार्षद, बिमला देवी पार्षद, दिनेश कौशल, अशोक कुमार पार्षद,राजीव सिंगला, कुलविंदर सिंह पार्षद, हीरा सिंह पार्षद, बलजिंदर कौर पार्षद, इंस्पेक्टर ठाकुर बलवीर सिंह, विजय कुमार पंच, उमेश जैन ( स्वर्णकार संघ प्रधान), डा. नवीन, डा. अजय कुमार, डा. मनोज, राजीव महाजन, बजरंगी पाण्डेय, राकेश अग्रवाल, डा.रणधीर सिंह, डा. प्रमोद, पूनम छाबड़ा, मनोज कुमार, संजीव जग्गी, सुमन बांसल, दविंदर , मुनीर शर्मा, एडवोकेट गोबिंद जसवाल, पार्षद गंगा प्रसाद, गुरदीप कटोच, नवजोत कटोच पार्षद, अमरीक चौहान पार्षद, और शहर की धार्मिक,राजनीतिक, सामाजिक संस्थाओं ओर शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।
अंत में मुनीश गुप्ता ( मुख्य यजमान),दिनेश कौशल,गोपाल अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल के सभी सदस्य ( अग्रवाल सभा)अश्वनी छोटा ओर युवा वाहिनी समिति के सदस्य,पवन शर्मा ओर कृष्ण गोपाल आनंद भारतीय सनातन धर्म महावीर दल,संजीव गुप्ता,कथा व्यास ओर उनकी टीम को सम्मानित किया।