चंडीगढ़, 10 अक्तूबर:- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 से अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने तक ग्रामीण और शहरी स्थानीय सरकारों तथा निकायों को अनुदान आवंटित करने के लिए छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें जारी रखने को मंजूरी दी गई।

यह निर्णय इसलिए लिया गया है, क्योंकि राज्य सरकार को अभी तक सातवें राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में, पहले अपनाई गई व्यवस्था के अनुसार, अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें मिलने तक स्थानीय सरकारों को धनराशि और अनुदान छठे राज्य वित्त आयोग की स्वीकृत सिफारिशों के अनुसार ही आवंटित किए जाएंगे।

स्वीकृत व्यवस्था के तहत राज्य के अपने कर राजस्व का वास्तविक आधार पर 7 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को आवंटित किया जाएगा। ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के बीच इस राशि का वितरण जनसंख्या को 80 प्रतिशत और क्षेत्रफल को 20 प्रतिशत भारांक देकर किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर उपलब्ध जनसंख्या के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।

जिला परिषदों और पंचायत समितियों के मामले में भी प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर उपलब्ध जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर राशि वितरित की जाएगी। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के बीच राशि का वितरण क्रमशः 75:15:10 के अनुपात में किया जाएगा। स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार, स्थानीय निकाय आवंटित राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा गलियों को पक्का करने पर खर्च कर सकेंगे।

इस व्यवस्था में यह भी प्रावधान किया गया है कि शहरी स्थानीय निकायों का वास्तविक राजस्व पिछले वर्ष के ऑडिट किए गए खातों में दर्शाए गए बजटीय राजस्व का कम से कम 85 प्रतिशत होना चाहिए। इस शर्त का पालन नहीं करने पर संबंधित शहरी स्थानीय निकायों को चालू वर्ष में राज्य वित्त आयोग के अनुदान के तहत अनुशंसित हिस्से में 20 प्रतिशत की कटौती का सामना करना पड़ेगा।