हिसार: 7 मार्च:- चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ फिशरीज साइंस द्वारा एससी/एसटी छात्रों के लिए ‘मत्स्य क्षेत्र में कौशल विकास एवं करियर उन्नति’ विषय पर एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। यह कार्यक्रम छात्र कल्याण निदेशालय के करियर एवं काउंसलिंग प्लेसमेंट सेल के सहयोग से आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को कौशल संवर्धन के माध्यम से सशक्त बनाना तथा मत्स्य पालन और एक्वा कल्चर क्षेत्र में बेहतर करियर के अवसर उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर छात्र कल्याण निदेशालय के अधिष्ठाता डॉ रमेश कुमार यादव मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देते हैं तथा एससी/एसटी समुदाय के छात्रों को व्यावसायिक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने मत्स्य क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, रोजगार सृजन करने और सतत आजीविका को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए तकनीकी ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम का आयोजन मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश गेरा, ऑफिसर इनचार्ज डॉ. रचना गुप्ता और विभागाध्यक्ष डॉ. दलीप कुमार बिश्नोई की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. मंजू रानी और डॉ. कविता शर्मा द्वारा किया जा रहा है, जो पूरे सप्ताह प्रशिक्षण सत्रों के संचालन की देखरेख करेंगी।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न सत्र होंगे आयोजित
प्रशिक्षण में विभिन्न मत्स्य विषयों के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिदिन व्याख्यान, प्रायोगिक प्रदर्शन और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में जलीय कृषि पद्धतियां, मत्स्य स्वास्थ्य प्रबंधन, मत्स्य संसाधन प्रबंधन, मछली प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, उद्यमिता विकास और मत्स्य क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार अवसरों जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। डॉ. कविता शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया जबकि मंच संचालन छात्रा ईशा द्वारा किया गया। इस अवसर पर एडीएसडब्ल्यू डॉ. संदीप धवन, डॉ. सुबोध अग्रवाल सहित शिक्षक, कर्मचारी व प्रतिभागी उपस्थित रहे।
