एस.ए.एस. नगर:- अमर शहीद जत्थेदार बाबा हनुमान सिंह जी के ऐतिहासिक शहीदी स्थल, गुरुद्वारा सिंह शहीदां, सोहाना में ब्रह्मलीन ब्रह्मज्ञानी संत बाबा अजीत सिंह जी हंसली वालों के वचनों के अनुसार 29 नवंबर 1993 से निरंतर चल रही सदीवी लड़ी (शाश्वत श्रृंखला) में 59वीं लड़ी के 5959वें श्री अखंड पाठ साहिब जी के संपूर्ण होने की खुशी में महान यज्ञ और गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इस दिन सुबह 9 बजे श्री अखंड पाठ साहिब जी के भोग डाले गए। इसके बाद दिन भर गुरमत समागम चला।
इसमें बीबी राजवंत कौर और फतेहगढ़ साहिब वाली बीवियों के इंटरनेशनल ढाढी जत्थे ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज 'धुर की बाणी' के बारे में संगतों को ढाढी वारों के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी। भाई अमनदीप सिंह, हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर ने अपने रसभिने कीर्तन द्वारा संगतों को ईलाही बाणी से जोड़कर निहाल किया। शिरोमणि प्रचारक भाई गुरभेज सिंह रानीमाजरा ने अपने प्रवचनों के माध्यम से संगतों को 'खंडे-बाटे की पाहुल' (अमृत) का महत्व बताया और अमृत छककर गुरु वाले बनने के लिए प्रेरित किया। 
इसके अलावा भाई मनप्रीत सिंह, भाई संतोष सिंह, भाई रंजीत सिंह, भाई सतवंत सिंह (पटियाला), भाई मनदीप सिंह (पिहोवा), भाई राजिंदर सिंह (लुधियाना), अकाल कवीशरी जत्था, मित्र प्यारे नू कीर्तनी जत्था, शेरे पंजाब कवीशरी जत्था, भाई हरप्रीत सिंह के जत्थों के अलावा गुरुद्वारा सिंह शहीदां के हजूरी जत्थों—भाई गुरमीत सिंह, भाई जसवंत सिंह, भाई इंदरजीत सिंह, भाई बलजिंदर सिंह और भाई संदीप सिंह ने कथा, कीर्तन और गुरमत विचारों द्वारा संगतों को निहाल किया। सभी जत्थों को 'सिरोपाओ' देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्री दरबार साहिब को फूलों से विशेष रूप से सजाया गया था। दरबार साहिब के बाहर और गेट तक के रास्ते को बहुत सुंदर ढंग से सजाया गया था। इस दिन हजारों संगतों ने पवित्र सरोवर में स्नान किया। संत बाबा परमजीत सिंह जी हंसली वाले और कई महापुरुषों ने पहुंचकर संगतों को दर्शन दिए। विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जांच की गई और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ओर से दवाइयां दी गईं। लड्डू, जलेबियां व अन्य मिठाइयां वितरित की गईं और गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के प्रवक्ता ने बताया कि ब्रह्मलीन ब्रह्मज्ञानी संत बाबा अजीत सिंह जी हंसली वालों के वचनों के सदका, श्री गुरु नानक देव जी महाराज के गुरपुरब के अवसर पर 29 नवंबर 1993 से शुरू हुई श्री अखंड पाठ साहिब जी की यह सदीवी लड़ी लगातार चल रही है। बाबा जी के वचनों के अनुसार, हर लड़ी के 101 श्री अखंड पाठ साहिब जी के पूर्ण होने पर विशाल गुरमत समागम और महान यज्ञ का आयोजन किया जाता है।