नई दिल्ली:- सोमवार को भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधनों की घोषणा की। इस कदम से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए रास्ता साफ हुआ है, जो E100 ईंधन पर चलने में सक्षम हैं। इस ईंधन में 100 प्रतिशत एथेनॉल होता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन E85 जैसे ईंधनों पर चलने के लिए तैयार किए जाते हैं, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और पेट्रोल का मिश्रण होता है, जबकि E100 में पूरी तरह एथेनॉल होता है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकता है, जिन्हें विशेष रूप से ऐसे उच्च-एथेनॉल मिश्रणों के लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया हो। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कि E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल या सामान्य पेट्रोल के लिए तैयार किए गए वाहनों में E85 या E100 ईंधन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।


हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों की वजन सीमा में वृद्धि

इन संशोधनों में वाहनों के वर्गीकरण के कुछ मानदंडों, ईंधन की विशेषताओं और उत्सर्जन परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी मानकों में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा, इन बदलावों के दायरे में आने वाले हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों की वजन सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है।

सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को बढ़ावा दे रही है। देश में E20 पेट्रोल पहले ही पेश किया जा चुका है, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इस साल जून में मारुति सुजुकी इंडिया ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल यात्री कार 'वैगनआर' पेश की, जो E20 से लेकर E100 तक के ईंधनों पर चलने में सक्षम है। मारुति के अलावा टोयोटा, टाटा मोटर्स और हुंडई सहित अन्य वाहन निर्माता कंपनियां भी भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन विकसित कर रही हैं। मंत्रालय ने इससे पहले केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव दिया था, जिसका उद्देश्य E85 और E100 के साथ-साथ B100 बायोडीजल तथा हाइड्रोजन-CNG मिश्रित ईंधनों के इस्तेमाल को संभव बनाना था।