हांसी, 1 अक्टूबर:- पुलिस अधीक्षक हांसी विनोद कुमार ने आमजन को साइबर ठगी से बचाव एवं ठगी होने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की सलाह देते हुए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ठगी के बाद शुरुआती समय, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, में की गई त्वरित कार्रवाई ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मददगार हो सकती है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले आरोपी अक्सर पीड़ित के खाते से रकम निकलवाने के बाद उसे अलग-अलग बैंक खातों में तेजी से ट्रांसफर करते हैं। ऐसे में पीड़ित यदि ठगी का पता चलने के बाद शिकायत करने में देरी करता है तो रकम के आगे कई खातों में पहुंच जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए साइबर फ्रॉड का पता चलते ही किसी भी प्रकार की झिझक या इंतजार किए बिना तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है।
ठगी होते ही ये कदम उठाएं
तुरंत 1930 पर कॉल करें।
साइबर ठगी का पता चलते ही राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत सूचना दें।
एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज करें।
नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाएं, ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा सके।
बैंक को भी तत्काल सूचना दें।
यदि ठगी की रकम बैंक खाते से निकली है तो संबंधित बैंक/वित्तीय संस्था को भी तुरंत जानकारी दें।
सबूत सुरक्षित रखें।
ठगी से संबंधित मोबाइल नंबर, मैसेज, स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, UPI आईडी, लिंक या अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें और पुलिस को उपलब्ध करवाएं।
‘गोल्डन ऑवर’ में कार्रवाई, रकम रोकने में मददगार
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने कहा कि साइबर अपराध के मामले में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण है। ठगी की रकम जितनी देर तक बैंकिंग प्रणाली में रहती है, उतना ही प्रयास उसे संबंधित खातों में रोकने या फ्रीज करवाने के लिए किया जा सकता है। इसलिए नागरिकों को ठगी के बाद शर्मिंदगी या डर के कारण चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि तुरंत 1930 पर कॉल कर घटना की जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि साइबर फ्रॉड होने पर इंतजार न करें और खुद रकम वापस लेने के प्रयास में समय न गंवाएं। तत्काल शिकायत करें, क्योंकि समय पर दी गई सूचना साइबर ठगी की रकम को आगे जाने से रोकने की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
