हरोली/ऊना, 23 अप्रैल (राजवीर चोपड़ा):- स्वर्गीय श्री भगत राम जी की अंतिम अरदास उनके पैतृक गांव माहल खुर्द में श्रद्धा और विराग भाव के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर तप स्थान श्री खुरालगढ़ साहिब के मुख्य सेवादार बाबा केवल सिंह के जत्थे द्वारा विरागमय कीर्तन किया गया, जिससे संगत को गुरबाणी से जोड़ने का संदेश मिला।
कीर्तन के दौरान उन्होंने गुरबाणी के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य के तीन गुरु होते हैं—पहला गुरु पिता, दूसरा गुरु माता और तीसरा धर्म की शिक्षा देने वाला धर्म गुरु। इन तीनों के आदेशों का पालन करना प्रत्येक मनुष्य का मूल कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जीवन को सरलता से जीना, मेहनत करना और नशे से दूर रहना ही मानव जीवन का सही उद्देश्य है। यह संसार एक चलती-फिरती मेला है, इसलिए अच्छे कर्म करते हुए जीवन जीना ही सच्ची जीवन शैली है।
इस मौके पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदानों को भी याद किया गया और कहा गया कि उनके कारण ही आज समाज में समानता और अधिकारों की स्थापना संभव हो पाई है।
श्री कांशीराम भलाई समिति के प्रधान निक्कू राम जनागल ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं अंबेडकर सभा के प्रधान सतीश लाल ने भी अपने विचार साझा करते हुए परिवार के साथ दुख प्रकट किया और समाज को अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संदेश दिया।
अंत में संदीप सिंह फौजी ने सभी रिश्तेदारों और उपस्थित संगत का धन्यवाद किया। इस अवसर पर समस्त संगत द्वारा तप स्थान श्री खुरालगढ़ साहिब की कार सेवा के लिए 11,300 रुपये की सेवा भेंट भी अर्पित की गई।