हांसी (दिनकर गावड़ी):- धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोकथाम करने तथा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला सचिवालय के वीसी सभागार में अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला नगर आयुक्त लक्षित सरीन की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसडीएम राजेश खोथ, नारनौंद के एसडीएम विकास यादव, डीडीपीओ संदीप भारद्वाज, एसडीओ डॉ. रविंद्र, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अशोक मेहरा, राजसिंह सहित विभिन्न गांवों के सरपंच तथा ग्राम सचिव उपस्थित रहे। बैठक में अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करें और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करवाएं।

अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन ने कहा कि पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि खेतों की उपजाऊ शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं, मिट्टी की उर्वरता कम होती है और फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। पराली के धुएं से आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को पर्यावरण संरक्षण और अपनी भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पराली जलाने से बचना चाहिए तथा उपलब्ध कृषि यंत्रों एवं वैज्ञानिक तरीकों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि पराली नहीं जलाने वाले पात्र किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि इस योजना की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए, ताकि किसान पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन को अपनाने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने गांवों में जागरूकता गतिविधियां चलाने और किसानों को पराली प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, नियमानुसार संबंधित कृषि अभिलेखों में भी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसानों को दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करना चाहिए। कार्रवाई संबंधित प्रावधानों एवं लागू नियमों के अनुसार की जाएगी।

बैठक में पराली प्रबंधन के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए बताया गया कि किसान खेत से बाहर पराली का उपयोग करने के लिए एक्स-सीटू प्रबंधन अपना सकते हैं। इसके तहत पराली को खेत में डंडलर या बेलर मशीन की सहायता से एकत्र करके गांठें बनाई जा सकती हैं। इसके बाद पराली को उपयोगी स्थानों तक पहुंचाकर विभिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई कि वे पराली को सड़कों के किनारे एकत्र करने के बजाय निर्धारित स्थानों पर सुरक्षित ढंग से रखें और उसके उचित उपयोग की व्यवस्था करें। इसके अलावा, पराली का उपयोग गोशालाओं, कंपोस्ट इकाइयों तथा अन्य उपयोगी कार्यों में भी किया जा सकता है।

वहीं, इन-सीटू प्रबंधन के तहत पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाकर उसका उपयोग किया जाता है। इसके लिए सुपर सीडर जैसी कृषि मशीनों की सहायता से पराली के बीच ही गेहूं की बिजाई की जा सकती है। इसके अलावा, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम युक्त कंबाइन हार्वेस्टर से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किया जा सकता है। पराली को खेत में मिलाने से जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।

अतिरिक्त उपायुक्त ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों, सरपंचों और ग्राम सचिवों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों के साथ संवाद करें और उन्हें पराली प्रबंधन के लाभों के बारे में बताएं। किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं, उपलब्ध कृषि यंत्रों और फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग के बारे में जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए वे किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ गांवों में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए भी सक्रिय सहयोग दें।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली नहीं जलाकर मिट्टी की उर्वरता बचाएं, प्रदूषण कम करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने में अपना योगदान दें। पराली प्रबंधन से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए किसान हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1663 पर संपर्क कर सकते हैं।