पटियाला:- सांझा साहित्यिक मंच पटियाला की ओर से अमरजीत लाइब्रेरी, भादसों रोड, पटियाला में एक साहित्यिक मिलनी का आयोजन किया गया। सुखविंदर चहल, नवदीप सिंह मुंडी, अमरजीत खरौड़, सतनाम चौहान और पाल खरौड़ द्वारा किए जा रहे इस विशेष प्रयास के तहत इस बार गगन मीत की गद्य पुस्तक "खला विच खिल्लरे खत" और राजीव सेठ के काव्य संग्रह "मेरे हिस्से दा सूरज" पर विचार चर्चा करवाई गई।
इस विशेष आयोजन में डॉ. अमरजीत कौंके, डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा, डॉ. लक्ष्मी नारायण भीखी, अमरजीत कस्क, डॉ. हरमन, बलबीर सिंह दिलदार, नछत्तर सिंह चहल, अमृतपाल सिंह शैदा, बचन सिंह गुरम, जोगा सिंह धनौला, बलविंदर भट्टी, इंज. जगराज सिंह, सतनाम कौर चौहान, कमल सेखों, सुखविंदर कौर, कुलविंदर चावला, जसविंदर कौर, हरचरण सिंह, रणधीर, दर्शन सिंह, फतेहजीत सिंह, तरसेम सिंह, भाग सिंह, आत्मा सिंह, पुष्पविंदर सिंह, सुखविंदर चहल, हरदीप सभ्रवाल, पाल खरौड़, अमरजीत खरौड़, नवदीप सिंह मुंडी विशेष तौर पर उपस्थित रहे।
समारोह के पहले चरण में मंच संचालन करते हुए सुखविंदर चहल ने राजीव सेठ की औपचारिक जान-पहचान करवाई। इसके उपरांत राजीव सेठ ने अपने काव्य संग्रह में से चुनिंदा कविताएं प्रस्तुत कीं। विचार चर्चा की शुरुआत करते हुए डॉ. अरविंदर कौर काकड़ा ने राजीव सेठ की कविताओं के संदर्भ में उनमें निहित सामाजिक सरोकारों और बिंबों की चर्चा करते हुए काव्य संग्रह की खूबियों और खामियों पर अपने विचार रखे। डॉ. लक्ष्मी नारायण भीखी ने कविताओं की पड़ताल करते हुए कहा कि राजीव सेठ की कविताएं सरोकारों के साथ ही प्रेम भाव को भी बखूबी प्रस्तुत करती हैं। अमरजीत कस्क ने काव्य संग्रह के आध्यात्मिक पक्ष के बारे में बात की। हरदीप सभ्रवाल, सतनाम कौर चौहान, बलविंदर सिंह भट्टी और नवदीप सिंह मुंडी ने भी अपने विचार रखे।
समारोह के दूसरे चरण में नवदीप सिंह मुंडी ने मंच संचालन करते हुए गगन मीत की गद्य पुस्तक "खला विच खिल्लरे खत" पर चर्चा शुरू करवाई, जिसमें हरदीप सभ्रवाल ने पुस्तक के संदर्भ में सिंगल पेरेंटिंग और पितृसत्ता, हरमन ने बाल मनोविज्ञान, अरविंदर कौर काकड़ा ने पिता-पुत्री के मोह और लक्ष्मी नारायण भीखी ने आधुनिक रिश्तों की त्रासदी जैसे बिंबों पर विचार व्यक्त किए। दर्शन सिंह और बचन सिंह गुरम ने भी पुस्तक पर गंभीर चर्चा की।
विचार चर्चा के अंत में डॉ. अमरजीत कौंके ने दोनों पुस्तकों के समग्र प्रभाव पर बात करते हुए कहा कि साहित्य प्रेमियों के लिए दोनों पुस्तकें पढ़ने योग्य और सहेजने योग्य हैं। उपरांत इंज. जगराज सिंह ने सांझा साहित्यिक मंच की ओर से सबका धन्यवाद किया। मंच की ओर से गगन मीत और राजीव सेठ को सम्मानित किया गया। मंच में शामिल बेटियों ने बापू नछत्तर सिंह चहल का विशेष सम्मान किया। इस मौके पर साहित्यिक मैगजीन "ऊड़ा" का पहला अंक भी लोकार्पित किया गया। कार्यक्रम में जोगा सिंह धनौला का विशेष सहयोग रहा।
गगन मीत की गद्य पुस्तक खला विच खिल्लरे खत और राजीव सेठ के काव्य संग्रह मेरे हिस्से दा सूरज पर विचार चर्चा
