नीलोखेड़ी/करनाल, 5 सितंबर:- प्रशासनिक सेवा में पद और अधिकार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण कर्तव्य के प्रति निष्ठा है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए कर्म के संदेश से अधिकारियों और जनसेवकों को यह सीख मिलती है कि व्यक्तिगत लाभ और प्रशंसा से ऊपर उठकर अपने दायित्व को पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और लोकहित की भावना से निभाना चाहिए। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कही। डॉ. चौहान ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश केवल कर्तव्य निर्वहन तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा भी देता है। अधिकारी को परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों, व्यक्तिगत भावनाओं और दबावों से ऊपर उठकर शांत मन से निर्णय लेना चाहिए। प्रशासन में सही निर्णय वही है, जो नियमों के अनुरूप होने के साथ-साथ व्यापक जनहित को भी ध्यान में रखता हो।
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी जितना बेहतर तरीके से जमीनी परिस्थितियों को समझेंगे, उतनी ही प्रभावी ढंग से वे नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में अपना योगदान दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि अधिकारियों को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना भी है।
डॉ. चौहान ने कहा कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव कागजों और रिपोर्टों से आगे जाकर आम नागरिक के जीवन में दिखाई देना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों में क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझने, लाभार्थियों की आवश्यकताओं को पहचानने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को जनहित से जोड़ने की क्षमता विकसित होना जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और अनुभव को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी ढंग से उपयोग करें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न प्रशासनिक एवं ग्रामीण विकास विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भादसो गांव में आयोजित एक्सपोजर विजिट रहा, जहां प्रशिक्षणार्थियों ने ग्रामीणों से संवाद कर केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना सहित ग्रामीण विकास से संबंधित कार्यों के धरातलीय क्रियान्वयन को भी नजदीक से समझा। इस दौरान उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि योजनाओं की प्रक्रिया कागजी स्तर से निकलकर वास्तविक लाभार्थी तक किस प्रकार पहुंचती है।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में कक्षा आधारित सत्रों के साथ व्यावहारिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया, ताकि प्रतिभागी प्रशासनिक विषयों को वास्तविक परिस्थितियों के संदर्भ में समझ सकें। उन्होंने कहा कि एक्सपोजर विजिट से प्रशिक्षणार्थियों को ग्रामीण क्षेत्र की आवश्यकताओं, चुनौतियों और सरकारी योजनाओं के प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला।
सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली से आए रोशन कुमार मिश्रा ने प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों से कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में निरंतर सीखने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बदलती प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकारियों को व्यावहारिक अनुभव, संवेदनशील दृष्टिकोण और प्रभावी कार्यशैली विकसित करनी चाहिए।
पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय भागीदारी की तथा अपने अनुभव एवं विचार भी साझा किए। प्रशिक्षणार्थियों ने संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रशिक्षण सुविधाओं और व्यावहारिक गतिविधियों की सराहना की।
इस अवसर पर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान से सहायक आचार्य संदीप कुमार राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से गुरविंदर सिंह, बंटी, कुलदीप, ऋतिक राज, सलमान, श्यामलाल, रेनू, सुनीता, विशाल, शिवम राजपूत, आयुषी, हिमांशु एवं शुभम सिंह राजपूत सहित संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।