जिंदबड़ी/नंगल/ऊना, 11 अक्तूबर (राजवीर चोपड़ा):- बेटी के जन्म पर किसी घर में किलकारियां गूंजती हैं, लेकिन उस खुशी को पूरे समाज के साथ बांटने का फैसला हर कोई नहीं कर पाता। जिंदबड़ी निवासी कमल संधु टोनी ने अपनी बेटी विराज संधु के जन्म की खुशी को यादगार बनाते हुए सूफी महफिल सजाई और समाज को खूबसूरत संदेश दिया कि बेटी किसी परिवार की जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि उसके आंगन की रौनक, दिल का सुकून और जीवन की सबसे अनमोल खुशियों में से एक है। बेटी के जन्म को उत्सव बनाकर कमल संधु टोनी ने ऐसी मिसाल पेश की, जिसका संदेश संगीत की महफिल से आगे बढ़कर समाज की सोच तक पहुंचता है।
बेटी विराज संधु के जन्म की खुशी में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लेकर परिवार को बधाई दी। पूरा माहौल खुशियों, अपनत्व और उत्साह से सराबोर रहा। रविवार देर शाम आयोजित कार्यक्रम में संत श्री केशवानंद महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि सूफी गायक बल्ली बैंस ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से महफिल में ऐसा समां बांधा कि उपस्थित लोग संगीत की सुरमयी दुनिया में खो गए। हर प्रस्तुति ने कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई और बेटी के जन्म की खुशी को और भी यादगार बना दिया।
इस आयोजन की सबसे खास बात केवल सूफी संगीत या लोगों की भीड़ नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी भावना रही। जिस समाज में आज भी कहीं-कहीं बेटियों और बेटों के बीच अंतर किया जाता है, वहां बेटी के जन्म पर इस तरह खुशी मनाना अपने आप में एक मजबूत संदेश है। एक पिता का अपनी बेटी के आगमन को पूरे उत्साह के साथ उत्सव बनाना उन परिवारों के लिए भी प्रेरणा है, जो आज भी पुरानी सोच की बेड़ियों में जकड़े हुए हैं। विराज संधु के जन्म की यह खुशी बताती है कि बेटी का आगमन किसी उत्सव से कम नहीं और उसके स्वागत में उठाया गया हर सकारात्मक कदम समाज में बदलाव की नई उम्मीद जगा सकता है।
कार्यक्रम में श्री केशवानंद जी महाराज सेवा ट्रस्ट की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष राजीव कुमार, उपाध्यक्ष कमल सिंह, सचिव सुनील कुमार, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार, मुख्य प्रचारक सुखविंदर सिंह तथा कार्यकारी सदस्य हरमीत सिंह और शशिपाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कमल संधु टोनी की इस पहल ने खुशियों के बीच एक ऐसा संदेश छोड़ा, जिसे शब्दों से अधिक भावनाएं बयां करती हैं। बेटी विराज संधु के जन्म पर सजी यह सूफी महफिल केवल एक पारिवारिक समारोह नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, समानता और उनके प्रति सकारात्मक सोच को समर्पित एक सुंदर प्रयास बन गई। एक पिता ने अपनी बेटी के स्वागत में खुशियों के दरवाजे खोले, तो उन खुशियों में शामिल सैकड़ों लोगों ने भी इस संदेश को आगे बढ़ाया कि बेटियां बोझ नहीं, परिवार की शान होती हैं; उनके आने से घर ही नहीं, जिंदगी भी रोशन होती है।
