होशियारपुर:- डेंगू के ट्रांसमिशन सीजन को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पंजाब द्वारा माननीय सिविल सर्जन होशियारपुर डॉ. मनदीप कमल के दिशा-निर्देशों के तहत डेंगू एवं अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले में लगातार विशेष गतिविधियां की जा रही हैं। इसी के तहत अर्बन होशियारपुर के विभिन्न वार्डों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा रोजाना घर-घर जाकर मच्छरों के लार्वा की जांच, लार्वा को नष्ट करने तथा लोगों को डेंगू से बचाव संबंधी जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत शहर होशियारपुर की टीमों द्वारा आज 1755 घरों की जांच की गई, जिनमें से 83 घरों में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर का लार्वा पाया गया। लार्वा पाए जाने वाले स्थानों पर तुरंत आवश्यकता के अनुसार लार्वीसाइड का छिड़काव करके लार्वा को नष्ट किया गया। इसके अलावा घरों में विभिन्न प्रकार के बर्तनों, कूलरों, पानी की टंकियों, गमलों, फ्रिज की ट्रे, पशुओं के लिए रखे पानी के बर्तनों तथा अन्य स्थानों पर जमा पानी को स्वास्थ्य टीमों द्वारा खाली करवाया गया।
स्वास्थ्य टीमों द्वारा लोगों को समझाया जा रहा है कि घरों में रखे किसी भी बर्तन या अन्य वस्तु में पानी जमा न होने दिया जाए। पानी वाले बर्तनों को सप्ताह में कम से कम एक बार खाली करके अच्छी तरह धोकर, साफ करके और सुखाया जाए। उन्हें बताया जा रहा है कि यदि किसी बर्तन में पानी रखना जरूरी हो तो उसे ढककर रखा जाए, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिल सके।
इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ नर्सिंग विद्यार्थियों की भी समय-समय पर भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। नर्सिंग विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के मच्छर के प्रजनन स्थलों की पहचान, पानी की निकासी तथा डेंगू से बचाव संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इस अवसर पर जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. जगदीप सिंह ने बताया कि डेंगू का मच्छर मुख्य रूप से साफ एवं जमा हुए पानी में पनपता है तथा दिन के समय काटता है। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए मच्छर के प्रजनन को रोकना सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रत्येक सप्ताह ‘ड्राई डे’ मनाते हुए अपने घरों एवं आसपास पानी जमा होने वाले सभी स्थानों की जांच करें तथा पानी वाले बर्तनों को खाली, साफ एवं सूखा रखें।
उन्होंने बताया कि अब तक जिले में डेंगू के 21 मामले और चिकनगुनिया के 2 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को घबराने के बजाय सावधान रहने की आवश्यकता है और बुखार या डेंगू से संबंधित लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करना चाहिए।
जिला मास मीडिया अधिकारी तरसेम लाल ने लोगों को डेंगू के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर एवं जोड़ों में दर्द, उल्टी तथा त्वचा पर दाने आदि डेंगू के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बाजू वाले कपड़े पहनने, मच्छरदानी एवं मच्छर भगाने वाले साधनों का प्रयोग करने तथा घरों के दरवाजों एवं खिड़कियों पर जालियां लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए ‘हर शुक्रवार डेंगू पर वार’ की भावना के साथ प्रत्येक नागरिक को सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने घर एवं आसपास पानी जमा होने वाले स्थानों की जांच करनी चाहिए।
सिविल सर्जन डॉ. मनदीप कमल ने कहा कि डेंगू ट्रांसमिशन सीजन के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा लार्वा सर्वे, लार्वा नष्ट करने, लार्वीसाइड का छिड़काव, फॉगिंग, घर-घर जागरूकता एवं स्वास्थ्य शिक्षा गतिविधियां लगातार की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें रोजाना फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा ले रही हैं और जहां भी मच्छरों के प्रजनन का स्रोत मिलता है, उसे तुरंत समाप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही डेंगू पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग की टीमों को घरों में सर्वे करने के लिए पूरा सहयोग दें और अपने घरों एवं आसपास पानी जमा न होने देने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा लोगों को डेंगू से बचाव संबंधी पंफलेट भी वितरित किए गए तथा घर-घर जाकर मच्छरों के प्रजनन को रोकने संबंधी जागरूक किया गया।