हांसी:– पुलिस अधीक्षक हांसी विनोद कुमार ने जिले के नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील करते हुए विस्तृत साइबर एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी स्वयं को बैंक अधिकारी, कस्टमर केयर प्रतिनिधि, बिजली विभाग का कर्मचारी, बीमा एजेंट, गैस एजेंसी, फास्टैग, ई-कॉमर्स कंपनी या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क किया जाता है,तो कभी ऑनलाइन सेवा उपलब्ध कराने, केवाईसी अपडेट करने, रिफंड दिलाने, इनाम जीतने या शिकायत का समाधान करने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता है।
उन्होंने बताया कि साइबर ठग अक्सर लोगों को व्हाट्सएप, एसएमएस, ई-मेल अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी लिंक भेजते हैं या मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है या ऐप इंस्टॉल करता है, ठग उसके मोबाइल और बैंकिंग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद बैंक खाते से अवैध लेन-देन कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है।
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने कहा कि कई बार लोग इंटरनेट पर उपलब्ध फर्जी कस्टमर केयर नंबरों पर कॉल कर बैठते हैं। साइबर अपराधी स्वयं को संबंधित कंपनी का कर्मचारी बताकर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवाते हैं या बैंकिंग जानकारी प्राप्त कर खाते से राशि निकाल लेते हैं। इसलिए किसी भी कंपनी, बैंक या संस्था का कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक मोबाइल एप्लीकेशन से ही प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को फोन, मैसेज, ई-मेल या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई संदिग्ध लिंक प्राप्त होता है या कोई अनजान व्यक्ति बैंक संबंधी जानकारी मांगता है, तो उस पर बिल्कुल भी भरोसा न करें। बैंक, आरबीआई अथवा कोई सरकारी संस्था कभी भी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, एटीएम कार्ड नंबर, नेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।

पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार की साइबर एडवाइजरी:-
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
ओटीपी, यूपीआई पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड, एटीएम/डेबिट-क्रेडिट कार्ड नंबर एवं सीवीवी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें।

इंटरनेट पर उपलब्ध कस्टमर केयर नंबरों पर आंख बंद करके विश्वास न करें। संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही नंबर प्राप्त करें।
किसी भी ऑनलाइन भुगतान या बैंकिंग लेन-देन से पहले वेबसाइट और मोबाइल ऐप की सत्यता अवश्य जांच लें।
मोबाइल फोन में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप केवल विश्वसनीय और आवश्यक स्थिति में ही डाउनलोड करें।
सोशल मीडिया पर आने वाले आकर्षक ऑफर, लॉटरी, इनाम, निवेश और नौकरी संबंधी संदेशों से सावधान रहें।
बैंक खाते में किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक से संपर्क कर अपना खाता सुरक्षित कराएं।
साइबर ठगी होने पर समय गंवाए बिना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें तथा www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
साथ ही नजदीकी साइबर थाना या पुलिस थाना में भी तुरंत शिकायत दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने कहा कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार लोगों की जल्दबाजी और लापरवाही है, जबकि आमजन की सबसे बड़ी ताकत जागरूकता और सतर्कता है। उन्होंने जिले के नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, ऐप, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर बिना जांच-परख के भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर अपराधियों तक पहुंचा जा सके और आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।