मोहाली:- एक ओर अयोध्या का राजमहल था, जहां श्रीराम के राजतिलक की खुशियां मनाई जानी थीं, तो दूसरी ओर एक ऐसा निर्णय था, जिसने पूरे राजपरिवार को शोक में डुबो दिया। जिस राम के राज्याभिषेक की प्रतीक्षा की जा रही थी, वही राम जब पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए राजमहल छोड़कर वन जाने को तैयार हुए, तो राम वनवास का प्रसंग भावनाओं से भर उठा। रामलीला एवं दशहरा ग्राउंड, फेज-1, मोहाली में श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला की इस रात्रि में राम वनवास का मार्मिक मंचन किया गया।
मंच पर कैकेयी के वरदान, राजा दशरथ की विवशता और श्रीराम के वन जाने के निर्णय ने कथा को ऐसा भावुक मोड़ दिया, जिसमें एक पिता का अपने पुत्र से बिछड़ने का दर्द, एक पुत्र का पिता के वचन के प्रति समर्पण और पत्नी सीता का पति के साथ हर परिस्थिति में खड़े रहने का संकल्प दिखाई दिया। राजसुख और वैभव को त्यागकर वन की राह चुनने वाले श्रीराम ने मर्यादा और कर्तव्य का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो रामायण के सबसे भावपूर्ण प्रसंगों में गिना जाता है।
इस मंचन में राजा दशरथ की भूमिका कमेटी के अध्यक्ष आशु सूद ने निभाई, जबकि कौशल्या की भूमिका रितु, कैकेयी की भूमिका मधु, सुमित्रा की भूमिका मोनिका और मंथरा की भूमिका साध्वी ने निभाई। भगवान श्रीराम के रूप में प्रतीक, लक्ष्मण के रूप में संदीप राणा और माता सीता के रूप में शिवानी ने अपने अभिनय से वनवास के प्रसंग को जीवंत किया। सुमंत की भूमिका रमन और वशिष्ठ की भूमिका आयुष ने निभाई। अन्य कलाकारों ने भी नागरिकों एवं राजदरबार से जुड़े पात्रों के माध्यम से मंचन को प्रभावशाली बनाया।
राम वनवास की कथा केवल राजपरिवार के दुख की कहानी नहीं, बल्कि त्याग, आज्ञापालन, प्रेम और मर्यादा का संदेश भी देती है। श्रीराम का सहज भाव से वनवास स्वीकार करना, सीता का उनके साथ चलने का निर्णय और लक्ष्मण का भाई के प्रति समर्पण आज भी लोगों को रिश्तों की अहमियत और कर्तव्य के प्रति निष्ठा की सीख देता है।
श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी के अध्यक्ष आशु सूद के नेतृत्व में आयोजित रामलीला के माध्यम से रामायण के इन प्रसंगों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 19 अक्टूबर तक जारी रहेगा, जबकि 20 अक्टूबर को विजयदशमी उत्सव मनाया जाएगा। कमेटी ने शहरवासियों से परिवार सहित पहुंचकर रामलीला देखने और इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है।
