संतोषगढ़/ऊना, 6 अप्रैल(राजवीर चोपड़ा):- जिला ऊना के सनोली, मजारा, मलूकपुर, पूना, बीनेवाल और अजौली गांवों के ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी रोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये सभी गांव ऊना जिले का हिस्सा होने के बावजूद लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी सुध लेने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी इन गांवों का कोई युवा विदेश में दुर्घटना या युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी जान गंवाता है, तो प्रशासन का कोई भी अधिकारी शोक संतप्त परिवारों तक नहीं पहुंचता। इससे ग्रामीणों में उपेक्षा और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
अजौली टोल बैरियर के पास बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं भी चिंता का बड़ा कारण बनी हुई हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह क्षेत्र अब हादसों का केंद्र बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग की लापरवाही के कारण पानी की निकासी के रास्ते बंद हो चुके हैं, जिससे हर साल घरों में तीन से पांच फुट तक पानी भर जाता है। हैरानी की बात यह है कि आज तक किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेना भी जरूरी नहीं समझा।
परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह चरमराई हुई है। गांवों की गाड़ियां किसी यूनियन में शामिल नहीं हैं, जिसके चलते स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए मजबूरन विदेशों का रुख करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, गांवों में गंदगी का आलम यह है कि तालाब कूड़े से भरे पड़े हैं और आवारा पशु खुलेआम गलियों और खेतों में घूम रहे हैं, जिससे किसानों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इन समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आगामी बरसात में हालात और भी बदतर हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि गांवों को राहत मिल सके और लोग सुरक्षित जीवन जी सकें।
इस संबंध में भूपिंदर सिंह, नरिंदर सिंह, केयर सिंह संधू, दलजीत सिंह, पाल सिंह पूना, मनजीत कौर, जसवीर कौर, राजेश कुमार, हरदयाल सिंह, अवतार सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद की है।
क्या ये गांव ऊना जिले का हिस्सा नहीं सनोली से अजौली तक ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
