चंडीगढ़:- मानवता की भावुक मिसाल पेश करते हुए मोहाली जिले के खरड़ स्थित गांव तेउर निवासी 18 वर्षीय सुरिंदर कौर के परिवार ने उनकी असामयिक मृत्यु के बाद अंगदान का निर्णय लिया। इस पुनीत पहल से दो मरीजों को नया जीवन मिला, जबकि दो अन्य को दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी।
सड़क दुर्घटना के बाद सुरिंदर कौर को 23 अगस्त 2026 को पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया था। गंभीर और अपरिवर्तनीय न्यूरोलॉजिकल क्षति के बाद सभी निर्धारित चिकित्सा परीक्षण पूरे होने पर 25 अगस्त को ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया। उनकी मां एवं निकटतम परिजन श्रीमती संतोष कौर ने अंगदान की सहमति दी।
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने परिवार के साहस की सराहना करते हुए कहा कि गहरे व्यक्तिगत दुख के बीच भी परिवार ने दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने का निर्णय लिया। उन्होंने दाता परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अंगदान को मानवता की महान अभिव्यक्तियों में से एक बताया।
ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप बंसल ने बताया कि परिवार के रिश्तेदार और पीजीआईएमईआर कर्मचारी श्री सुरजीत सिंह ने भी परिवार को अंगदान के महत्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चिकित्सकीय उपयुक्तता के आकलन के बाद दोनों किडनियां, अग्न्याशय और कॉर्निया सफलतापूर्वक निकाले गए। एक किडनी और अग्न्याशय का 31 वर्षीय पुरुष मरीज में एक साथ प्रत्यारोपण किया गया, जिसे सिमल्टेनियस पैंक्रियाज-किडनी (एसपीके) ट्रांसप्लांट कहा जाता है। दूसरी किडनी का 15 वर्षीय मरीज में सफल प्रत्यारोपण किया गया, जबकि दोनों कॉर्निया से दो मरीजों को दृष्टि मिलने की उम्मीद है।
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एस. कोहली ने बताया कि दोनों मरीज लंबे समय से डायलिसिस पर थे और उनकी समयबद्ध तैयारी तथा बहु-विषयक चिकित्सा प्रबंधन ने सफल प्रत्यारोपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि एसपीके प्रत्यारोपण बेहद जटिल था। मरीज की सात वर्ष पहले मां द्वारा दान की गई किडनी विफल हो चुकी थी और प्रमुख नसों के अवरुद्ध होने के कारण डायलिसिस के विकल्प सीमित थे। प्रत्यारोपण के साथ विफल किडनी निकालने और इलियक वेन की मरम्मत भी करनी पड़ी। करीब 13 घंटे की सर्जरी और लगभग 18 घंटे के टीम प्रयास के बाद प्रक्रिया सफल हुई।
रोटो नॉर्थ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने कहा कि संभावित अंगदाता की पहचान से लेकर ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा, पारिवारिक परामर्श, अंग निकासी और प्रत्यारोपण तक सभी चरणों में विभिन्न चिकित्सा टीमों के समन्वय ने इस सफलता को संभव बनाया।
सुरिंदर कौर की मां ने कहा, “हम सुरिंदर को वापस नहीं ला सकते, लेकिन अगर उसका कोई हिस्सा किसी और के जीवन में जीवित रह सकता है, तो उसके जीवन का अर्थ बना रहेगा।”
सुरिंदर की जीवन विरासत अब उन लोगों के माध्यम से जीवित रहेगी, जिन्हें उनके अंगदान से नई उम्मीद मिली है।
अल्पायु में बुझी जिंदगी अंगदान से चार जिंदगियों को नई उम्मीद
