करनाल ,13 अक्टूबर: करनाल के नागरिक अस्पताल में प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत हो जाने से परिजनों में गहरा आक्रोश है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स की लापरवाही के कारण बच्चे ने जन्म लेते ही दम तोड़ दिया।
उनका कहना है कि प्रसव पीड़ा बढ़ने के बावजूद नर्स ने समय पर डिलीवरी नहीं कराई और बीच में खाना खाने चली गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मृतक शिशु के परिजन दोषी स्टाफ नर्स और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
**अभी दर्द बढ़ने दो” कहती रही नर्स: परिजनों का आरोप
जानकारी के अनुसार, कुंजपुरा निवासी गुरसेवक ने 12 अक्तूबर की शाम अपनी बहू पिंकी को लेबर पेन होने पर करनाल के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया। पिंकी की ननद सोनिया ने बताया कि उन्होंने कई बार नर्स को बताया कि महिला को तेज दर्द हो रहा है, लेकिन नर्स बार-बार यही कहती रही— “अभी दर्द और बढ़ने दो।” परिजनों के मुताबिक, इसी बहाने काफी समय बीत गया और हालात बिगड़ते गए।
**डिलीवरी से पहले खाना खाने चली गई नर्स
परिजनों का आरोप है कि जब प्रसूता को तेज दर्द हुआ, तो उसे लेबर रूम में ले जाया गया, जहां पहले से एक अन्य महिला की डिलीवरी चल रही थी। उसके बाद नर्स ने कहा कि वह पहले खाना खाकर आएगी, फिर अगली डिलीवरी करेगी। इस बीच प्रसूता को असहनीय दर्द हुआ और बच्चा बाहर आने लगा।
**सफाई कर्मचारी ने बच्चे को पकड़ा, तब तक देर हो चुकी थी
नवजात के पिता गुरसेवक का कहना है कि जब बच्चा बाहर आया, तो लेबर रूम में केवल सफाई कर्मचारी मौजूद थी, जिसने बच्चे को संभाला और कई बार नर्स को बुलाने की कोशिश की। लेकिन नर्स ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में पिंकी की ननद सोनिया बाहर भागी और स्टाफ को बुलाकर लाई, लेकिन तब तक बच्चे की हालत बिगड़ चुकी थी।
**पहला बच्चा था, खुशियां उजड़ गईं” – पिता
गुरसेवक ने बताया कि उनकी शादी को केवल एक साल हुआ था और यह उनका पहला बच्चा था। उन्होंने कहा कि डिलीवरी सामान्य थी, फिर भी नर्स ने अनावश्यक रूप से सात टांके लगा दिए। परिजनों का कहना है कि अस्पताल स्टाफ की लापरवाही ने उनके घर की सारी खुशियां छीन लीं।
**पुलिस जांच में जुटी, कार्रवाई की मांग
मामले की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और अस्पताल स्टाफ से पूछताछ की। परिजनों ने मांग की है कि दोषी नर्स और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
