लुधियाना, 21 अक्टूबर, 2026:- गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने वैज्ञानिक मुर्गी पालन के तरीकों को बढ़ावा देने, तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो सप्ताह का ‘मुर्गी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम’ आयोजित किया। इस कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों से आए 50 प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें 47 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल थीं।
उप-कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रसार शिक्षा विंग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विज्ञान-आधारित ज्ञान के प्रसार, व्यावहारिक कौशल विकास और जरूरत-आधारित प्रशिक्षण पहलों के माध्यम से पशुपालकों को सक्षम बनाने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई। मुर्गी पालन की बढ़ती संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने जोर दिया कि यह व्यवसाय उद्यमिता और रोजगार सृजन के बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने और किसान समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में पशुपालन से जुड़े व्यवसायों के महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा की। उन्होंने मुर्गी पालन को रोजगार के साधनों में विविधता लाने और आर्थिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया, विशेष रूप से उन ग्रामीण युवाओं के लिए जो स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं।
प्रसार शिक्षा विभाग के प्रमुख एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि पाठ्यक्रम में वैज्ञानिक मुर्गी उत्पादन के प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया था। इनमें पोल्ट्री शेड, चारा एवं पोषण प्रबंधन, रोगों की रोकथाम और नियंत्रण, जैव सुरक्षा उपाय, पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां तथा विपणन रणनीतियां शामिल थीं। इन सत्रों का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को उचित प्रबंधन पद्धतियों से परिचित कराना, उत्पादन संबंधी जोखिम कम करना, पक्षियों के स्वास्थ्य को बनाए रखना और फार्म की कुल लाभप्रदता में सुधार करना था। कार्यक्रम के व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रतिभागियों को मुर्गी फार्म चलाने की दैनिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
वेंकीज़ इंडिया लिमिटेड के सहायक महाप्रबंधक डॉ. हरपाल सिंह सोढ़ी ने आधुनिक व्यावसायिक मुर्गी उत्पादन पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने मौजूदा उत्पादन पद्धतियों के बारे में उद्योग-आधारित दृष्टिकोण साझा किए और मुर्गी पालन क्षेत्र में उभरते अवसरों पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय डॉ. राजेश कसरीजा और डॉ. प्रतीक सिंह ने किया, जबकि छात्र समन्वयक डॉ. नल्लापति साईं अंजना ने सहयोग दिया।
