आज 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भारत की आजादी में उनके अद्वितीय योगदान के लिए याद कर रहा है। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर शहर में हुआ था, उनका पूरा नाम मोहन दास करम चंद गांधी था। उनके पिता का नाम करम चंद गांधी और माता का नाम पुतली बाई गांधी था। वह 1893 से 1914 तक दक्षिण अफ्रीका में रहे। उन्होंने वकालत की डिग्री प्राप्त की। उन्हें कई बार विदेशी धरती पर नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। यहीं से उनके सीने में देश की आजादी का झंडा लहराया और वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रभावशाली चेहरा बनकर उभरे।
महात्मा गांधी एक सच्चे देशभक्त, एक सफल वकील और एक आदर्शवादी नेता थे। उनके दर्शन का आधार आध्यात्मिक या धार्मिक सार है। वे ईश्वर के अस्तित्व में दृढ़ विश्वास रखते थे। उनके वैचारिक स्रोत श्री मद्भागवत गीता, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, पवित्र बाइबिल, गोपाल कृष्ण गोखले, लियो टॉल्स्टॉय और जॉन रस्किन थे। टॉल्स्टॉय की पुस्तक "द किंगडम ऑफ गॉड इज विदइन यू" का गांधीजी के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
इसी प्रकार जॉन रस्किन की पुस्तक "अनटू दिस लास्ट" भी उनके लिए प्रेरणा का स्रोत थी। गांधीजी ने इस पुस्तक को सर्वोदय कहा, जिसका अर्थ है सबका उदय।
महात्मा गांधी का सत्य, ईमानदारी और अहिंसा में अटूट विश्वास था। वे अपने सिद्धांतों से समाज और हर व्यक्ति को बदलना चाहते थे। वे स्वदेशी वस्तुओं, घरेलू उद्योगों और हस्तशिल्प के संरक्षक थे। जीवन में गांधीवादी सिद्धांतों के सच्चे अनुयायियों में आचार्य विनोबा भावे, जय प्रकाश नारायण और मार्टिन किंग लूथर जूनियर थे। गांधीजी सच्चे अर्थों में सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वे स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए सौहार्दपूर्ण आंदोलन के पक्षधर नहीं थे। देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने 'सत्यगृह' का मार्ग चुना। यह अवधारणा 20वीं सदी की शुरुआत में बापू गांधीजी द्वारा पेश की गई थी और बुराई के खिलाफ दृढ़, लेकिन अहिंसक प्रतिरोध का आह्वान किया गया था।
आज के समय में हमें गांधीवादी सिद्धांतों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। सत्य का सर्वोच्च विचार स्वतः ही गांधीजी के सत्याग्रह के विचार की ओर ले जाता है। वर्तमान समय में समाज में व्याप्त कुरीतियों और बुराइयों को दूर करने के लिए महात्मा गांधी के अनमोल दार्शनिक विचारों से मार्गदर्शन लेने की जरूरत है। गांधीजी का सत्याग्रह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय लोगों का एक प्रभावी हथियार साबित हुआ, जिसे बाद में सरकारी उत्पीड़न के खिलाफ अन्य देशों में उग्रवादी समूहों ने भी अपनाया। अहिंसा प्राचीन भारतीय दर्शन है जो जैन धर्म का मूल आधार है, इस सिद्धांत को महात्मा गांधी ने भी अपने जीवन में अपनाया था। आज भी उनके सिद्धांत प्रासंगिक हैं। "मेक इन इंडिया" गांधीजी के आत्मनिर्भरता के आदर्श की अभिव्यक्ति है। उन्होंने नशामुक्त समाज, जातिगत भेदभाव से मुक्त, मानवता की भलाई के लिए विज्ञान, सिद्धांतों के साथ राजनीति और नैतिकता के साथ वाणिज्य की कल्पना की थी। आइये आज उनके जन्म दिवस पर हम सब उनके सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दें। देविंदर कुमार - मुख्य संपादक
Editorial
गांधी जयंती पर विशेष - "दे दी हमें आज़ादी बिना खड़ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल"
