करनाल, 23 अक्तूबर: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का 2551वां निर्वाण उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के जैन मंदिरों और स्थानकों में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यक्रम जैन स्थानक सेक्टर-14 और दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित किए गए। जैन मंदिर में निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया। सुबह से ही मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आरंभ हो गई थी। इस अवसर पर जैन स्कूल के बच्चों ने दीपावली के विषय पर सुंदर पोस्टर बनाए, जिन्हें बाद में पुरस्कृत किया गया। 
कार्यक्रम में बीरेश जैन, एस.सी. जैन, निर्दोष जैन, अजय जैन, राकेश जैन, दिनेश जैन, एस.के. जैन सहित अनेक लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। इसी तरह जैन स्थानक सेक्टर-14 में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर जैन साध्वी डॉ. सरिता जी महाराज ने उपस्थित जनों को दीपावली और भगवान महावीर के निर्वाण से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अनुयायी निर्वाण उत्सव को दीपावली के रूप में मनाते हैं, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। 
साध्वी जी ने बताया कि भगवान महावीर के मोक्ष प्राप्त करने पर देवताओं और गंधर्वों ने आकाश में दीप प्रज्वलित कर दीपावली का उत्सव मनाया था। तभी से हर वर्ष दीपावली को भगवान महावीर का निर्वाण दिवस मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि आज के ही दिन से वीर संवत आरंभ होता है। इस वर्ष वीर संवत 2051वां चल रहा है, जो जैन धर्म का सबसे प्राचीन संवत माना जाता है। दीपावली से ही नया साल शुरू होता है और इसी दिन व्यापारी अपने खाते-बही बदलते हैं। 
साध्वी डॉ. सरिता जी ने कहा कि भगवान महावीर ने पाँच महाव्रतों का उपदेश दिया था, जिन्हें बाद में महात्मा गांधी ने अपने जीवन में अपनाया और उन्हें ‘पंचशील सिद्धांत’ के रूप में मान्यता दी। उन्होंने कहा कि यदि विश्व भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चले तो शांति और भाईचारे की स्थापना संभव है। दीपावली के दिन ही भगवान महावीर के प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी। 
साध्वी जी ने यह भी बताया कि अल्बर्ट आइंस्टाइन भी जैन दर्शन से प्रभावित थे। जैन धर्म ने विज्ञान की सटीक परिभाषा दी है जिसमें सापेक्षता का सिद्धांत, अणु-परमाणु की अवधारणा, ऊर्जा संरक्षण, जन्म-पुनर्जन्म, आत्मा और परमात्मा, चल-अचल जीव, सूक्ष्म जीव जैसे वैज्ञानिक और दार्शनिक सिद्धांतों का वर्णन मिलता है।