नवांशहर: एकीकृत एवं नशा पीड़ितों के पुनर्वास केंद्र नवांशहर द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र नंबर 01, सलोह में “महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस” मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता श्रीमती दर्शन कौर (सरपंच) ने की। इस सेमिनार को संबोधित करते हुए परियोजना निदेशक श्री चमन सिंह ने कहा कि भले ही राजा-महाराजाओं का जन्म महिला के गर्भ से हुआ हो, लेकिन आज भी हमारा समाज पितृसत्तात्मक समाज है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के बावजूद भी उनके खिलाफ हिंसा नहीं रुक रही है। इसके पीछे मुख्य कारण समाज की मानसिकता और ठोस कानूनों का अभाव है। लोकतंत्र हो, राजशाही हो या तानाशाही, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, अपराध और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले हर जगह देखने को मिलते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 736 बिलियन महिलाएं या 3 में से 1 महिला ने अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार शारीरिक या यौन हिंसा या दोनों का अनुभव किया है। महिलाएं और लड़कियां घर, कार्यस्थल और यात्रा के दौरान हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती हैं।
महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र 25 नवंबर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाता है। महिलाओं के खिलाफ अपराध दर की सूची में असम सबसे ऊपर है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को रोकने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा कई कारणों से दर्ज नहीं की जाती है। इसके मुख्य कारणों में अपराधियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न होना, पीड़ितों में विश्वास की कमी, पीड़िता और उसके परिवार की चुप्पी, कलंक और शर्म शामिल हैं।
इसके बाद सुश्री कमलजीत कौर (काउंसलर) ने अपने विचार प्रस्तुत किए और कहा कि भले ही महिलाएं हर क्षेत्र में समानता के लिए काम करती हैं, लेकिन आज भी उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता है चाहे वे ऐसा करें या नहीं।
उन्होंने महिलाओं के उत्पीड़न के बारे में एक कविता प्रस्तुत की और कहा कि एक महिला को खुद में मजबूत होना चाहिए ताकि सामाजिक बुराइयों और शोषण को कम किया जा सके। उसके बाद श्रीमती जसविंदर कौर (काउंसलर) ने भी अपने विचार पेश किए और कहा कि समानता के साथ-साथ हमें दहेज प्रथा या यौन शोषण जैसी घटनाओं के बारे में भी जागरूक होना चाहिए ताकि अपराधों को कम या कम किया जा सके।
इस अवसर पर स्टाफ सदस्य श्री दीपक चोपड़ा ने भी अपने विचार पेश किए और कहा कि हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए ताकि लोग उनकी अहमियत को समझ सकें। अंत में श्रीमती हरजीत कौर ने रेड क्रॉस टीम का धन्यवाद किया और कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए इस तरह की जागरूकता एक बहुत अच्छा कदम है। इस अवसर पर एकीकृत एवं पुनर्वास केंद्र नशा पीड़ितों, नवांशहर द्वारा श्रीमती दर्शन कौर (सरपंच) को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर गांव की महिलाओं द्वारा सवाल भी पूछे गए। इस अवसर पर पूर्व सरपंच परमजीत सिंह, आंगनवाड़ी वर्कर, हरजीत कौर, गुरदेव कौर, लछमी रानी, संतोष शर्मा, सोमा रानी, इंदु बाला, जगीर कौर और बड़ी संख्या में गांववासी मौजूद थे।
“समाज की मानसिकता बदलने से ही महिलाओं की पीड़ा समाप्त हो सकती है” चमन सिंह (प्रोजेक्ट डायरेक्टर)
