होशियारपुर- दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय आश्रम गौतम नगर होशियारपुर में साप्ताहिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें श्री आशुतोष महाराज जी की सेविका साध्वी सुश्री राणे भारती जी ने कहा कि इस धरती पर ईश्वर का अवतरण एक सद्पुरुष द्वारा की गई मौन प्रार्थना का उत्तर है।
आज हम इस जीवन की भागदौड़ में इतने व्यस्त हैं कि हमारा ध्यान भी भटक जाता है। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है क्योंकि भौतिकवाद के इस युग में समाज की गति भी तेज होती जा रही है और इस गति में हमें अपने मन को एकाग्र करके प्रार्थना के भाव को हृदय में धारण करके ईश्वर का स्मरण करना है।
जीवन रूपी नदी के प्रवाह में, हमारी आत्मा रूपी नदी के भीतर गर्जना या कलकल की ध्वनियाँ तब तक सुनाई देती रहेंगी जब तक हम मूल स्रोत, राम रूपी सागर से नहीं मिल जाते। हमारी यह यात्रा लंबी और कठिन है। इसलिए हमें किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो इस यात्रा में हमारा उत्साह बढ़ाए और हमारा साथी बने ताकि हमारी आत्मा भी भक्तों और संतों की तरह अपने गंतव्य, ईश्वर तक पहुँच सके।
साध्वी जी ने कहा कि साधक के आध्यात्मिक जीवन के विकास में गुरु की भूमिका सर्वोपरि मानी जाती है, क्योंकि गुरु ही निराशावादी मन को आशावादी बनाते हैं। वे हमें चेतन और विवेकशील बनाते हैं तथा स्पष्ट दृष्टि प्रदान करते हैं। महापुरुषों ने इस संसार को कारागार के समान कहा है।
क्योंकि इस संसार में रहते हुए हमारी आत्मा बंधन में है। वह चौरासी के चक्र में फँसी हुई है और जीवन जीने के लिए भी मनुष्य को संसार रूपी इस कारागार में प्रतिदिन अनेक समस्याओं से जूझना पड़ता है।
परन्तु विचारणीय तथ्य यह है कि संसार के सभी लोग इस कारागार में रहते हुए अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं। इस कारागार से, अर्थात् मोह के बंधन से, कोई भी मुक्ति नहीं चाहता। कोई विरला ही होता है जो महापुरुषों से दिव्य ज्ञान प्राप्त करके संसार रूपी कारागार से मुक्त होता है। अतः हमारा प्रयास जीवन में सही चुनाव करने का विवेक प्राप्त करने का होना चाहिए।
गौतम नगर होशियारपुर में साप्ताहिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन।
