लुधियाना, 16 अक्टूबर, 2026:- गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने “चारा उत्पादन: स्थिति, चुनौतियां और भविष्य की रणनीति” विषय पर विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया। इस सत्र में 86 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें पंजाब में चारा उत्पादन की वर्तमान स्थिति, क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों और पशुपालन को टिकाऊ बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
उद्घाटन सत्र के दौरान कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने टिकाऊ डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे, बेहतर कृषि तकनीकों तथा संस्थागत सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने चारा उत्पादन में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की विश्वविद्यालय की योजना के बारे में भी जानकारी दी।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने पूरे वर्ष गुणवत्तापूर्ण चारे की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चारा उत्पादन में मशीनीकरण, साइलेज तैयार करने और जलवायु परिवर्तन का सामना करने में सक्षम किस्मों के उपयोग पर जोर दिया।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. मखन सिंह भुल्लर ने वैज्ञानिक तरीके से चारे की खेती करने और किसानों पर केंद्रित प्रसार पहलों की आवश्यकता पर बल दिया। पशु पोषण विभाग के प्रमुख डॉ. जसपाल सिंह हुंदल ने चारा उत्पादन और पशुपालन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए विद्यार्थियों तथा युवा पेशेवरों को शामिल करने के महत्व को रेखांकित किया।
कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी के डीन डॉ. राम सरन सेठी ने नवाचार, उद्यमिता और व्यावहारिक कारोबारी मॉडलों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनुसंधान को व्यावसायिक तकनीकों में बदलने के महत्व पर भी चर्चा की। एटारी, जोन-1, लुधियाना के डॉ. आर. के. राणा ने चारा उत्पादन की बेहतर तकनीकों को बढ़ावा देने में कृषि अनुसंधान और प्रसार व्यवस्था की भूमिका पर जोर दिया। पीएयू के डॉ. आर. एस. सोहल ने चारे की उत्पादकता और पोषण मूल्य बढ़ाने में उन्नत चारा किस्मों तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों के महत्व पर चर्चा की।
तकनीकी सत्रों के दौरान डॉ. नवजोत सिंह बराड़ ने पंजाब में चारा उत्पादन की वर्तमान स्थिति पर विचार रखे। डॉ. राहुल कपूर ने राज्य में चारे की नई किस्में विकसित करने के कार्यक्रमों की जानकारी दी। श्री विपिन शर्मा ने चारा उत्पादन में मशीनीकरण पर चर्चा की, जिसमें बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और साइलेज तैयार करना शामिल था। डॉ. अल्ला सिंह ने उच्च गुणवत्ता वाला साइलेज तैयार करने के लिए मक्के के उपयोग के बारे में जानकारी दी। डॉ. रुचिका भारद्वाज ने जलवायु-अनुकूल चारा उत्पादन और टिकाऊ पशुपालन में इसकी संभावनाओं पर जोर दिया। डॉ. जसपाल सिंह लांबा ने चारे की बेहतर गुणवत्ता, पोषण और साइलेज तकनीकों पर चर्चा की।
डॉ. जसविंदर सिंह और डॉ. रवदीप सिंह ने आयोजन सचिवों के रूप में कार्यक्रम का संचालन किया। विद्यार्थी संयोजक विक्षांश और हरयुवराज सिंह बेदी ने आयोजन में सहयोग दिया।
