मुंबई:- यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने का असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता अपने आपूर्तिकर्ताओं को एक बार में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करते हैं। ऐसे में खुदरा लेन-देन पर शुल्क से छूट मिलने के बावजूद उन्हें थोक खरीदारी के दौरान अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।

आईएसबी के इस सर्वेक्षण में देशभर के 720 से अधिक रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को शामिल किया गया। इसमें 10.4 प्रतिशत विक्रेताओं ने बताया कि सर्वेक्षण से पहले के 10 दिनों के दौरान उनके आपूर्तिकर्ताओं ने यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर उनसे अतिरिक्त शुल्क मांगा था।

अध्ययन के अनुसार, खुदरा लेन-देन पर शुल्क से छूट मिलने से छोटे कारोबारियों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इससे थोक खरीदारी के दौरान किए जाने वाले भुगतानों की लागत से उन्हें पूरी तरह राहत नहीं मिल पाएगी। सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने की अनुमति दी थी। हालांकि, लगभग 96 प्रतिशत लेन-देन को इससे छूट दी गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इसे दिवाली के बाद तक टाल दिया गया। इसके लागू होने की नई तारीख अभी स्पष्ट नहीं है।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए आईएसबी के एसोसिएट प्रोफेसर प्रसन्ना तंत्री ने कहा कि यूपीआई के मुफ्त लेन-देन के कारण कारोबारियों को कितना नुकसान हो रहा है, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने पर तभी विचार किया जाना चाहिए, जब मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना संभव न रह जाए।