जालंधर:- पंजाब लोक सांस्कृतिक मंच (पल्स मंच) के प्रधान अमोलक सिंह और जनरल सेक्रेटरी कंवलजीत खन्ना ने लिखित प्रेस बयान में कहा कि एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा सामाजिक विज्ञान की किताब में मनु स्मृति के कुछ हिस्से शामिल करने और 9वीं कक्षा के सिलेबस में से फ्रांस और रूसी क्रांति का इतिहास हटा देने का विरोध करते हुए कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना हमारी शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए।
इसके लिए ऐतिहासिक, प्रामाणिक और वैज्ञानिक नजरिए से स्वस्थ सिलेबस का उद्देश्य, हमारी आज की और आने वाली पीढ़ी को भविष्य के मार्गदर्शक और निर्माता बनाना होता है। नेताओं ने कहा कि मनु स्मृति साझी और गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत की जड़ों में तेल डालने का काम करती है। यह समाज के सबसे अधिक सम्मानित मजदूर वर्ग को आर्थिक, सामाजिक, जात-पात और बौद्धिक गुलामी के अंधेरे कुएं में धकेलती है।
इसी तरह 9वीं कक्षा के सिलेबस में से फ्रांस और रूसी क्रांति से संबंधित सिलेबस हटाने, नाज़ीवाद के उभार के बारे में चैप्टर को भी किनारे कर देने का गंभीर नोटिस लेते हुए उन्होंने कहा कि ये देश को हर तरह की देसी-विदेशी गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर रखने और सामाजिक बदलाव का द्वार खोलने वाली ऐतिहासिक सूझ-बूझ से वंचित रखने के आपराधिक कदम हैं।
समाज को पीछे की ओर मोड़ने वाला गैर-वैज्ञानिक सिलेबस विद्यार्थियों पर थोपना और लोक-पक्षी, समाज-मुखी चेतना का प्रकाश बांटने वाले इतिहास, सामाजिक विज्ञान का सिलेबस विद्यार्थियों की नजर से ओझल रखना वास्तव में विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे कुएं में फेंकना है, ताकि समाज के अंदर मजबूत पकड़ बना रही हाकिम जमातों के पक्ष में घिसी-पिटी लोक-विरोधी सोच को लोगों पर थोपने का रास्ता साफ किया जा सके।
पल्स मंच नेताओं ने कहा कि पंजाब सरकार केंद्र की भाजपा सरकार से भी दो कदम आगे जाते हुए केजरीवाल-सिसोदिया के इशारों पर चलती पंजाब की आम आदमी सरकार बड़े पैमाने पर धार्मिक स्थानों, विविध समागमों के लिए खजाने के मुंह खोलने और रोजगार मांगती जवानी को डंडों के जोर से खामोश करने, अंध-विश्वास और धार्मिक कट्टरवाद की पहल पिलाकर लोगों का ध्यान उनके असल जीवन मुद्दों से हटाने के लिए जादूगरी कर रही है।
उन्होंने कहा कि इसका हर जागती आंख को — विशेषकर विद्यार्थी, अध्यापक, बौद्धिक वर्ग, इतिहासकार, साहित्यकार, तर्कशील, वैज्ञानिक जम्हूरी जत्थेबंदियों और व्यक्तियों को — गंभीर नोटिस लेते हुए ये कदम वापस कराने के लिए आवाज़ बुलंद करने के लिए आगे आना चाहिए।
विद्यार्थी सिलेबस में मनु स्मृति थोपने और इतिहास पर पर्दा डालने के खिलाफ आवाज़ उठाने की ज़रूरत पल्स मंच
