करनाल:-  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और एनडीआरएफ ने अमोनिया गैस रिसाव पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें अमोनिया गैस ले जाते टैंकर से गैस रिसाव होने को नियंत्रित किया गया। मॉक ड्रिल में गैस ले जा रहे टैंकर से गैस के रिसाव बारे डायल 112 आपातकालीन नंबर पर सूचना दी गई। सूचना प्राप्त होने पर डायल 112 ने संबंधित विभागों को सूचना दी जिसमें आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एनडीआरएफ शामिल थे। 
संबंधित विभागों का प्रतिक्रिया समय लगभग ठीक रहा। पुलिस विभाग ने प्रभावित इलाके को सील किया जबकि एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड विभाग हादसे में हताहत लोगों को बाहर निकाला और स्वास्थ्य विभाग ने उनको प्राथमिक उपचार देते हुए अस्पतालों में पहुंचाया।
 एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट अनिल रणवा ने बताया कि यह मॉक ड्रिल काफी सफल रही। मॉक ड्रिल कमियां पता लगाने और उनको ठीक करने के लिए की जाती हैं। ऐसे केमिकल हादसों के समय प्रतिक्रिया समय से अधिक महत्वपूर्ण एक्शन प्लान होता है, क्योंकि केमिकल हादसे में बचाव दल के पास फुल प्रूफ एक्शन प्लान होना जरूरी है नहीं तो बचाव दल भी इसकी चपेट में आ सकता है। 
उन्होंने कहा कि इस मॉक ड्रिल में कुछ कमियां निकल कर सामने आईं जैसे कि फायर विभाग के पास एसईबीए मास्क और वॉटर कर्टन नहीं थे। ऐसे केमिकल हादसों में ये उपकरण अति महत्वपूर्ण हैं, जिनका बचाव दल के पास होना अति आवश्यक है। क्योंकि केमिकल हादसों में आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, शारीरिक केमिकल रिएक्शन जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। 
ऐसे हादसों में बचाव दल को बहुत ही सावधानीपूर्वक और पूर्ण उपकरणों के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए। इनके साथ भी हवा की दिशा, केमिकल की मात्रा, रिसाव या अन्य हादसों की गति और आसपास के एरिया की संपूर्ण जानकारी के साथ ही बचाव दल को आगे बढ़ना चाहिए।
डीआरओ मनीष यादव ने एनडीआरएफ की असिस्टेंट कमांडर अनिल रणवा व एनडीआरएफ रोहतक की टीम का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह मॉक ड्रिल एनडीआरएफ के सहयोग से संभव हो पाई है। इस मॉक ड्रिल से विभिन्न विभागों को यह सीखने को मिला है कि केमिकल हादसों के दौरान किस प्रकार से राहत व बचाव कार्य को अंजाम देना है। 
ऐसे हादसों के दौरान प्रयोग होने वाले उपकरण भी हमारा विभाग खरीदेगा, ऐसी सभी जरूरतें पूरी की जाएंगी जो आवश्यक हैं ताकि भविष्य में ऐसा हादसा होने पर बचाव कार्य को तेजी व प्रभावी ढंग से किया जा सके। 
मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ रोहतक की 30 जवानों की टीम शामिल रहीं जिसने घटनास्थल पर एनडीआरएफ स्टोर, कम्युनिकेशन पोस्ट, कमांड पोस्ट और मेडिकल पोस्ट स्थापित कीं। उन्होंने आम जनता से अपील की कि ऐसे हादसों के समय घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा जारी हिदायतों की पालना करें।