होशियारपुर:- मानव जीवन में सफलता ओर विफलता का नाता बना रहता हैं कभी सफल व्यक्ति विफल हो जाता हैं तो कभी विफल व्यक्ति सफलता का परचम लहराता नज़र आता हैं। इस सफलता ओर विफलता के अनेक कारण होते हैं लेकिन एक कारण भवन की वास्तु होता है।
अगर आपका भवन निर्माण करते समय आंतरिक और बाहरी वास्तु के साथ पंच तत्व रंग द्वार दिशा दहलीज़ भूमि की ढलान आकार ब्रह्म स्थान वंश रज्जु मर्म मुसा त्रियक रेखा सम विषम पद ओर अंशों को सही स्थान प्रदान किया है तो सफलता आपके कदम चूमेगी नाम यश कीर्ति ख्याति आर्थिक सामाजिक शारीरिक शैक्षिक विकास में आपको अर्गणी रखेगी! आप हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से ओत प्रोत रहेंगे।
इसके विपरीत कहीं भी किसी भी रूप में वास्तु दोष उत्पन्न है जैसे आग्नेय में जल नेरित्य में खड्डा वायव्य कटा हुआ ईशान में शोचालय सीढ़िये आदि निर्मित है तो व्यक्ति को विफल होने में देर नहीं लगती जो भवन आपकी सुरक्षा के लिए निर्मित है वही आपका छुपा हुआ दुश्मन बन जाता हैं मारकेश की भूमिका अदा करने वाला बन जाता हैं।
ऐसा मानना है अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का। वास्तु को लेकर एक कहावत सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है कि- ईश्वर आपकी गलती को माफ़ कर देता है। लेकिन ग़लत वास्तु माफ नहीं साफ़ कर देता है।
वास्तु के परिणाम किसी चमत्कार से कम नहींडॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री
