संतोखगढ़/ऊना, 19 अप्रैल (राजवीर चोपड़ा):- संतोखगढ़ की गलियां जैसे ही दिनभर की चहल-पहल के बाद शांत हो जाती हैं और लोग अपने घरों में गहरी नींद में सो जाते हैं, उसी समय शहर की सुरक्षा की असली जिम्मेदारी शुरू होती है।
रात के अंधेरे और सन्नाटे के बीच संतोखगढ़ पुलिस और होमगार्ड के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ गश्त पर निकलते हैं। हाथों में टॉर्च, आंखों में सतर्कता और दिल में जिम्मेदारी का भाव लिए ये जवान हर गली, चौक और मोड़ पर नजर बनाए रखते हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।
ठंडी हवाओं और सुनसान सड़कों के बीच उनकी मौजूदगी ही आम लोगों के लिए सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक बन जाती है। ये जवान केवल कानून-व्यवस्था के रखवाले ही नहीं, बल्कि इंसानियत के सच्चे प्रहरी भी हैं। कभी किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो या किसी जरूरतमंद की मदद करनी हो—हर परिस्थिति में ये हमेशा आगे रहते हैं।
इनकी ड्यूटी केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जुनून है, जो इन्हें हर मौसम और हर परिस्थिति में मजबूती से डटे रहने की प्रेरणा देता है।
रात 2 बजकर 32 मिनट पर किए गए औचक निरीक्षण के दौरान चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन पुलिस और होमगार्ड के जवान पूरी सतर्कता के साथ गश्त करते नजर आए। यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि जब पूरा शहर सो रहा होता है, तब ये जवान हमारी सुरक्षा के लिए जाग रहे होते हैं।
संतोखगढ़ की इन वर्दियों को सलाम, जो बिना किसी शोर-शराबे के हर रात हमारी हिफाजत की जिम्मेदारी निभाते हैं। ये केवल पहरेदार नहीं, बल्कि हमारे सुकून के असली हकदार हैं।