पंजाब की साहित्यिक विरासत के प्रतिनिधि कवि सिरी राम जी का आज सुबह देहांत हो गया। उनका अंतिम संस्कार मोहाली में किया गया।
पंजाबी ग़ज़ल की स्थापना के लिए महान कार्य करने वाले श्री राम अर्श का जन्म 15 दिसंबर 1934 को लुधियाना में हुआ था। वे 1992 में पंजाब जनसंपर्क विभाग से उपनिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए।
केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ सेखों के लोक सचिव प्रो. संधू वरयानवी और कार्यालय सचिव लोक शायर जगदीश राणा ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि सिरी राम अर्श पंजाबी साहित्य जगत के एक स्तंभ ग़ज़लकार थे। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पंजाबी साहित्य जगत को भी अपूरणीय क्षति हुई है।
उन्होंने कहा कि सिरी राम अर्श अपने बड़े भाई पूर्व विधायक चौधरी अजीत कुमार के पदचिन्हों पर चलते हुए जीवन भर शोषित, वंचित और ज़रूरतमंद वर्ग की आवाज़ उठाते रहे। पंजाबी ग़ज़ल लेखन में उनका विशेष स्थान था। उनकी रचनाओं में रबाब (ग़ज़ल संग्रह -1975) शामिल हैं।
अग्नार (काव्य संग्रह, 1975) संखे ते सिप्पियाँ (ग़ज़ल संग्रह, (1984) सरघियाँ ते समुद्र (ग़ज़ल संग्रह, 1987) किरणां दी बुक्कल (ग़ज़ल संग्रह, 1993) स्पर्श (काव्य संग्रह, 1985) पुरसलात" (ग़ज़ल संग्रह, 1981) ग़ज़ल समुद्र" (ग़ज़ल संग्रह, 1989) "अगामी नूर" (महाकाव्य, 1994) पंथ सजायो खालसा" (महाकाव्य, 1999) समुद्र संजम" (ग़ज़ल संग्रह, 2001) तुम चंदन (महाकाव्य (2002) गुरु मिलियो रविदास" (महाकाव्य हिंदी, 2005)।
उनका एक उपन्यास है संदली पौन (उपन्यास) गद्य संग्रह आलोकरी शक्ति गुरु रामदास एक स्मारक रचना है। भाषा विभाग पंजाब द्वारा शिरोमणि पंजाबी कवि के रूप में सम्मानित श्री राम अर्श के निधन पर साहित्य कला एवं सहयोगी बराक मंच के अध्यक्ष डॉ. कंवल भल्ला, पंजाब साहित्य मंच के अध्यक्ष कुलविंदर गाखल, दोआबा साहित्य सभा के उपाध्यक्ष लधाना झिक्का, कलाम दी परवाज़ के अध्यक्ष गुरदीप सिंह सैनी, अदबी दुनिया जालंधर के अध्यक्ष जसविंदर सिंह जस्सी, न्यू चेतना पंजाबी लेखक के अध्यक्ष जगदीश दलिया मंच, माखन लुहार, और अन्य लेखक अमरजीत सिंह संधू, माखन मान, भगवंत रसूलपुरी, नकाश चित्तेवानी, मित्र मंजीत, रेशम चित्रकार, देस राज बाली, चरणजीत समालसर, माला अग्रवाल, सतपाल सहलों, पवन भामियां, सविंदर संधू, प्रो. अकवीर कौर, शमी जालंधरी, दादर पंडोरवी, केसर करमजीत, गुरमुख लुहार, गुरनाम बावा आदि ने गहरा दुख व्यक्त किया।
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