होशियारपुर:- राधा कृष्ण मंदिर में राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज जी के सानिध्य में दोपहर 1:00 बजे से चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे परम श्रद्धेय संत श्री गौरदास जी महाराज ने आज बताया कि भगवान कृष्ण की ढाई वर्ष की लीला गोकुल महावन की है। उसके बाद वह नंद बाबा के साथ वृंदावन आ गए। यहां पर प्रभु ने गोपियों को प्रेम और भाव का रस प्रदान किया और साथ ही साथ राक्षसो का उद्धार भी किया।
जब प्रभु गैया चराने वनों में गए तो एक दिन वृत्तासुर गौवंश अर्थात बैल के रूप में आया। जो कि अज्ञान का प्रतीक है भगवान ने उसका वध कर दिया। ऐसे ही जब हम भक्ति करने बैठते हैं तो सबसे पहले अज्ञानता की बाधा ही आती है। यह बाधा गुरु कृपा और उनके सत्संग से दूर हो जाती है।
अगली बार प्रभु के सामने बकासुर राक्षस आया यह पूतना का भाई है। यह बगुले का रूप बनाकर आया जो कि दिखावे का प्रतीक है। भक्ति में दिखावा बिल्कुल नहीं होना चाहिए दिखावा करेंगे तो हमारी भक्ति में गिरावट आने लगेगी। इसके बाद अघासुर राक्षस अजगर के रूप में आया जो कि पाप का प्रतीक है।
महाराज जी ने बताया जब हम भक्ति शुरू करते हैं तो हमें धीरे-धीरे पाप छोड़ देने चाहिए। पर यदि पाप नहीं छूट रहे तो हरी का नाम भी नहीं छोड़ना चाहिए। जब हम निरंतर भक्ति भाव से भगवान का नाम लेते रहेंगे तो धीरे-धीरे हमारे पाप छुट्ते चले जाएंगे और हम अपनी नौकरी व्यापार एवं ग्रहस्थ के सारे कर्म करते हुए इसी जन्म में प्रभु की प्राप्ति कर लेंगे।
