होशियारपुर:- वैदिक वास्तु में दैविक शक्ति, गूढ़ रहस्यों, सकारात्मक ऊर्जा, दिव्य ऊर्जा, पवित्रता ओर संवेदनशीलता का स्त्रोत माना जाता है। ज्ञान, बुद्धि, चेतना, धर्म एवं अध्यात्म की कारक दिशा जिसका की भगवान शिव प्रतिनिधित्व करते हैं। देव गुरु बृहस्पति के अधीनस्थ, जल तत्व प्रधान दिशा समस्त सुखों का कारक भी मानी जाती है।
 ऐसा मानना है अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री का। मानव जीवन की सभी नव चेतनाओं, धार्मिक, सामाजिक, मानसिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, शैक्षणिक और समस्त निर्णायक गतिविधियों, संतान सुख, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास एव ईश्वरीय कृपा इसी कोण से प्राप्त होती है। 
ईशान कोण के वास्तु दोष उपरोक्त सभी मानव जीवन से परे कर देते हैं! ईशान कोण में शोचालय, भारी निर्माण, ईशान का धट जाना गंभीर वास्तुदोषों में शामिल होते है। ईशान कोण को साफ़ सुथरा, हल्का, पवित्र रखना चाहिए। साथ ही आंवले की लकड़ी के मंडपनुमा (परगोला) आकृति का निर्माण करके घटे हुए ईशान कोण के वास्तु दोष कम किए जा सकते हैं। ईशान कोण को दोष मुक्त रख कर हम समस्त सुखों की प्राप्ति कर सकते हैं।