करनाल, 31 अक्तूबर: म्हारा हरियाणा आज 59 वर्ष का हो गया। दूध–दही की भूमि, रणबांकुरों की धरती और खेल–गौरव का राज्य — हरियाणा ने इन दशकों में खेतों से लेकर खेल मैदानों, उद्योग से लेकर शिक्षा तक हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुई हैं। प्रथम मुख्यमंत्री पंडित भगवत दयाल शर्मा से लेकर ताऊ देवीलाल, भजनलाल, बंसीलाल, मनोहर लाल और अब नायब सिंह सैनी तक नेतृत्व बदलता रहा, लेकिन प्रदेश तरक्की के पथ पर आगे बढ़ता रहा।
गुरुग्राम जैसा आधुनिक शहर, कुरुक्षेत्र जैसा धर्म–ज्ञान केंद्र और 22 जिलों वाला यह प्रदेश आज भी अपने दो पुराने जख्मों के साथ खड़ा है अपनी राजधानी का अभाव और अलग हाईकोर्ट की प्रतीक्षा।
आज भी चंडीगढ़ का इंतजार:
1966 में पंजाब से अलग हुए हरियाणा को चंडीगढ़ साझा राजधानी के रूप में मिला और यह वादा भी कि भविष्य में चंडीगढ़ हरियाणा को मिलेगा। लेकिन आज 59 साल बाद भी यह वादा अधूरा है। कई नए राज्य बने, राजधानी भी बनी, हाईकोर्ट भी बने, पर हरियाणा आज भी इंतजार में है।
पिछली सरकारों ने अलग हाईकोर्ट और राजधानी स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए। जबकि करनाल को राजधानी के लिए सबसे उपयुक्त माना गया था भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टि से।
दक्षिण हरियाणा में धीमी रफ्तार:
गुरुग्राम और फरीदाबाद को छोड़ दें तो उद्योग विस्तार की गति अपेक्षा के अनुसार नहीं रही। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र और करनाल जैसे शहरों को सांस्कृतिक–धार्मिक राजधानी के तौर पर विकसित करने की संभावनाएं भी अभी तक अधूरी हैं। लोगों की उम्मीदें अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से जुड़ी हैं कि वे हाईकोर्ट और राजधानी के स्वप्न को साकार करेंगे।
हरियाणा बिना अलग हाईकोर्ट आम आदमी की बड़ी पीड़ा:
अधिवक्ताओं का कहना है कि हरियाणा को अलग हाईकोर्ट न होने की वजह से न्याय मिलने में देरी होती है। वकीलों ने अलग बार काउंसिल और अधिवक्ताओं के लिए कल्याण योजनाओं की भी मांग उठाई है।
लंबित मामलों का भार:
जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामले लगभग 14,25,000+
हाईकोर्ट में लंबित मामले 4,50,000+ अनुमानित मुकदमेबाज लोग 45 लाख से अधिक
इतने बड़े न्यायिक बोझ के बावजूद हरियाणा का अपना हाईकोर्ट नहीं है। अधिवक्ताओं का कहना है कि तेज न्याय और बेहतर न्यायिक प्रणाली के लिए हरियाणा और पंजाब के लिए अलग–अलग हाईकोर्ट होना आवश्यक है।
हरियाणा की मिट्टी को सलाम:
खेती, खेल, फौज, उद्योग, सेवा और संकल्प हरियाणा ने हर फलक पर अपनी पहचान बनाई है। 59 साल के इस सफर में हरियाणा फर्श से अर्श तक पहुंचा, पर अब समय है कि उसे उसकी राजधानी और उसका अपना न्यायालय भी मिले।
