पूर्वी चंपारण, बिहार- पत्रकारों पर दर्ज झूठे मुकदमे की जांच की मांग पर चंपारण परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक हर किशोर राय ने निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के संस्थापक शाहनवाज हसन के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 24 सितंबर 2025 को बेतिया में उनसे मुलाकात कर पूर्वी चंपारण के तीन पत्रकारों - संजीव जायसवाल, नीरज कुमार और सागर सूरज पर दर्ज मुकदमों की जांच और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में संघ के संस्थापक शाहनवाज हसन, प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र झा व शिवप्रसाद तिवारी शामिल थे। संघ के संस्थापक ने डीआईजी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज मामलों को मनगढ़ंत और झूठा बताया गया। 
ज्ञापन में बताया गया कि पत्रकार संजीव जायसवाल के खिलाफ घोड़ासहन थाने में एससी/एसटी एक्ट और रंगदारी का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ पुलिस अधीक्षक द्वारा अपराधियों की तरह इश्तेहार जारी किया गया है, जिसकी संघ ने कड़ी निंदा की है।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार सागर सूरज पर डुमरिया घाट थाने में एससी/एसटी एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से पत्रकार नीरज कुमार के मामले को उजागर किया। उन्हें पताही थाने में 2021 में हत्या के एक गंभीर आरोप में जेल भेजा गया था। संघ ने इस मामले में पूर्व में भी मुख्य सचिव और डीजीपी को जांच के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जिला और थाना स्तर पर न्याय की उम्मीद खत्म हो गई, क्योंकि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुपात लगभग शून्य रहा है।

डीआईजी का आश्वासन
डीआईजी हर किशोर राय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने पत्रकारों पर हो रही इस तरह की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि डीआईजी के हस्तक्षेप से इन पत्रकारों को न्याय मिलेगा और झूठे मुकदमों का सिलसिला थमेगा। इस मुलाकात ने पत्रकारों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है कि न्याय की प्रक्रिया में ईमानदारी और निष्पक्षता बरती जाएगी।