करनाल, 28 सितम्बर: धन-धन गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा सिंह सभा में 14वां महान गुरमत समागम बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में संगत ने भाग लेकर नतमस्तक होकर न केवल आशीर्वाद प्राप्त किया, बल्कि गुरु का अटूट लंगर भी श्रद्धापूर्वक बरता।
गुरमत समागम का आयोजन गुरु रामदास जी सेवक जत्था द्वारा किया गया। समागम में प्रसिद्ध रागी जत्थों ने शब्द-कीर्तन के माध्यम से गुरु रामदास जी के जीवन और इतिहास का वर्णन किया, जिससे वातावरण भक्ति और भावनाओं से भर उठा।
कीर्तन दरबार में भाई चमकौर सिंह (दून तरनतारन), भाई मेहताब सिंह (जालंधर), भाई तेजेंद्र सिंह (करनाल) और भाई जोगिंदर सिंह (नीलोखेड़ी) ने अपनी मधुर वाणी से संगत को भाव-विभोर कर दिया। श्रद्धालु पूरे समय भक्ति रस में लीन रहे और गुरु घर की शिक्षाओं को आत्मसात किया।
इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूरे समागम के दौरान सेवा-भाव और भाईचारे का अनूठा संदेश प्रसारित हुआ। संगत ने कहा कि ऐसे समागम समाज में आध्यात्मिकता और आपसी एकता को मजबूत करते हैं।
समागम के दौरान हज़ूरी रागी जत्थों ने गुरु रामदास जी द्वारा स्थापित अमर शहीदों की परंपरा, सेवा और त्याग के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु की शिक्षाएं हमें सच्चाई, निस्वार्थ सेवा और भाईचारे की राह पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।
इस मौके पर संगत ने अरदास कर देश-प्रदेश में शांति, भाईचारे और खुशहाली की कामना की। समागम में बीबी सतविंदर कौर व ईष्मन कौर ने ‘तेरे भरोसे प्यारे मैं लाड लडायो’ गाकर कीर्तन से संगत को निहाल किया।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से सभी संगत का विशेष धन्यवाद किया गया और आने वाले समय में भी ऐसे गुरमत समागम लगातार आयोजित करने का संकल्प लिया गया। संगत ने कहा कि गुरु रामदास जी की शिक्षाओं को जीवन में उतारकर ही हम सच्चे अर्थों में अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
धन गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व 14वां गुरमत समागम धूमधाम से सम्पन्न
