चंडीगढ़, 10 नवंबर:- पंजाबी लेखक संघ ने पंजाब कला भवन में संघ के संस्थापक तेरा सिंह चैन की स्मृति में एक साहित्यिक महोत्सव का आयोजन किया। महोत्सव में साहित्य, कला और संस्कृति से संबंधित प्रदर्शनियों और प्रस्तुतियों ने बड़ी संख्या में आए दर्शकों का मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि गुरप्रीत घुग्गी ने कहा कि साहित्य हमें रचनात्मक बनाता है और पुस्तकों से युक्त घर अपने आप में आरामदायक होता है। डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने तेरा सिंह चैन के साहित्यिक योगदान को अद्वितीय बताया। डॉ. सरबजीत सिंह ने उनके संगठनात्मक कार्यों को प्रेरणादायक बताया। सुरजीत सिंह धीर ने संघ को चैन जी के पदचिन्हों पर चलकर नई उपलब्धियाँ हासिल करने वाला बताया। स्वर्णजीत स्वाई, दर्शन बुट्टर, दीपक शर्मा चनारथल और भूपिंदर सिंह मलिक ने भी चैन जी के योगदान की सराहना की।
सभा द्वारा इतिहास और वार्षिक गतिविधियों पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन किया गया। पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना ने 'तेरा सिंह चैन सिरियां ते संग्राम' का विमोचन किया। सुरेश कुमार, डॉ. दीपा और अवि संधू की पुस्तकों का भी लोकार्पण किया गया।
प्रख्यात लोक कलाकार बलकार सिद्धू को तेरा सिंह चैन स्मृति पुरस्कार (नकद, पदक और प्रशस्ति पत्र) से सम्मानित किया गया। चैन परिवार से मनदीप सिंह, दिलदार सिंह, निताशा और डॉ. अमीर सुल्ताना उपस्थित रहे और मनदीप ने चैन जी से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं।
श्रोताओं उषा कंवर और सुरिंदर कुमार को बलविंदर सिंह उत्तम ने नकद पुरस्कार और पदक प्रदान किए। पूर्व पदाधिकारी गुलज़ार सिंह संधू, डॉ. दीपक मनमोहन सिंह, डॉ. लाभ सिंह खीवा, डॉ. शिंदरपाल सिंह, डॉ. स्वराज संधू, डॉ. गुरमेल सिंह और शाम सिंह आंग को सम्मानित किया गया।
सभा ने चार प्रस्ताव पारित किए। सुखविंदर सिंह सिद्धू ने पंजाबी को चंडीगढ़ की प्रशासनिक भाषा बनाने का प्रस्ताव पेश किया। मनजीत कौर मीत ने पंजाब में पंजाबी भाषा कानून को पूरी तरह लागू करने का प्रस्ताव पेश किया। डॉ. अवतार सिंह पतंग ने संयुक्त संघर्ष के माध्यम से पंजाब विश्वविद्यालय को बचाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया और गुरनाम कंवर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमलों की निंदा का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
डॉली सिंह ने गुरविंदर लवली, राजिंदर सिंह और करम चंद के साथ मिलकर लोकगीतों की महफ़िल पेश की। सांस्कृतिक प्रदर्शनियाँ, पुस्तक प्रदर्शनी, चित्रकला और सुलेख कला आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले की सफलता में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया। पाल अजनबी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
उपस्थित श्रोताओं में बी.एन. शर्मा, मलकियत रौनी, शिविंदर महल, भारत भूषण वर्मा, परमजीत पल्लू, पम्मी सिद्धू संधू, जंग बहादुर गोयल, कैप्टन नरिंदर सिंह, जसबीर भुल्लर, एस.के. अग्रवाल, जे.एस. खुशदिल, जगतार भुल्लर, नवदीप गिल, दीप्ति बबूटा, अवतार सिंह पाल, गुरदेव पाल, परमजीत परम, हरबंस सोढ़ी, अमराव सिंह गिल, सुरजीत कौर बैंस, मल्कियत बसरा, शायर भट्टी, सिमरजीत ग्रेवाल, अनु शर्मा, रोहन शर्मा, नवनीत मथारू, नरिंदर नसरीन, शमशील सिंह सोढ़ी, अजीत हमदर्द, गुरजोध कौर, लाभ सिंह लेहली और हरमिंदर कालरा आदि शामिल थे।
तेरा सिंह स्मृति साहित्य महोत्सव ने स्थापित किए नए कीर्तिमान साहित्य से जीवन और भी सुंदर बनता है गुरप्रीत घुग्गी
