हिसार, 7 अप्रैल:- दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट के तत्वावधान में एफ.सी. कॉलेज, हिसार के मनोविज्ञान विभाग में “मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन एवं न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार” विषय पर एक विस्तृत, ज्ञानवर्धक एवं व्यवहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में एम.ए. मनोविज्ञान, बी.ए. मनोविज्ञान तथा एम.ए. योग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी समझ को और अधिक सशक्त बनाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. अनीता सहारावत ने की तथा मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पियूषा शर्मा के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ। इस अवसर पर सहायक प्रवक्ता (मनोविज्ञान) डॉ. रिंकू, सुश्री सुचित्रा, सुश्री सुशीला एवं सुश्री सुमन की विशेष उपस्थिति रही। 
कार्यशाला के मुख्य वक्ता राजपाल सिंह बासनीवाल (सीनियर रिहैब प्रोफेशनल एवं समन्वयक, दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट) ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार है, जो उसके व्यवहार, सोच, भावनाओं एवं सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है। उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, प्रतिस्पर्धा, डिजिटल निर्भरता एवं सामाजिक दबाव के कारण उत्पन्न मानसिक समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
        उन्होंने न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों जैसे ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, एडीएचडी, संचार विकार एवं मोटर विकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा इनके कारणों जैसे आनुवंशिक कारक, मस्तिष्क विकास में असंतुलन, गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी, जन्म के समय जटिलताएं एवं पर्यावरणीय प्रभावों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में सहयोगी के रूप में अरुण राठी (विशेष अध्यापक) एवं अनुप्रिया वर्मा (मनोवैज्ञानिक) ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से व्यावसायिक कौशल विकसित कराए।
कार्यक्रम का शुभारंभ मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पियूषा शर्मा द्वारा किया गया तथा समापन प्राचार्या डॉ. अनीता सहारावत द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट के सभी विशेषज्ञों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना। अंत में आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों, प्राध्यापकों एवं सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।