हरियाणा/नारनौल:- लाला लाजपत राय पशु-चिकित्सा एवं पशु-विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय प्रो.(डॉ.) विनोद कुमार वर्मा के निर्देशानुसार "गौशालाओं में नस्ल सुधार संगोष्ठी" का भव्य आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का आयोजन हरियाणा पशु विज्ञान केन्द्र, महेंद्रगढ़ तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग, महेंद्रगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किसान कॉन्फ्रेंस हॉल, नारनौल में किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय "श्रेष्ठ आनुवंशिकी, श्रेष्ठ गौवंश" रखा गया, जिसका उद्देश्य गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से गोवंश का संवर्धन करना है। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. देवेंद्र सिंह व डॉ. ज्योति शुंठवाल, वैज्ञानिक, हरियाणा पशु विज्ञान केन्द्र, महेंद्रगढ़ द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, लुवास हिसार के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा जी रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. संदीप कुमार गुप्ता, अनुसंधान निदेशक लुवास हिसार, डॉ. नसीब सिंह, डिप्टी डायरेक्टर पशु पालन विभाग, डॉ. दिनेश मित्तल, क्षेत्रीय निदेशक, हरियाणा पशु विज्ञान केन्द्र, महेंद्रगढ़, अनिल (प्रांत सहसंयोजक, गौसेवा गतिविधि), कप्तान हंसराज (जिला संघचालक, महेंद्रगढ़) और अरुण कौशिक (जिला गौसेवा संघ, महेंद्रगढ़) ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए और कुलपति महोदय ने गौशाला प्रतिनिधियों के साथ जानकारी सांझा करते हुए बताया कि महेंद्रगढ़ जिले में हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र रेवासा के साथ-साथ नारनौल में पशु रोग जांच प्रयोगशाला भी है इसके साथ ही पशुपालक लुवास के सोशल मीडिया , व्हाटसअप परामर्श सेवा का भी उपयोग कर सकते है । 
संगोष्ठी के दौरान तकनीकी सत्र का संचालन करते हुए डॉ. ज्योति शुंथवाल (वैज्ञानिक, एचपीवीके, महेंद्रगढ़) ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और गौशालाओं के विशेष संदर्भ में "किफायती आहार निर्माण" पर विस्तृत एवं उपयोगी व्याख्यान दिया। उन्होंने कम लागत में पशुओं के बेहतर पोषण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक वैज्ञानिक उपाय साझा किए। इसके पश्चात, डॉ. दविंदर सिंह द्वारा एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र का संचालन किया गया, जिसमें उपस्थित गौशाला कार्यकर्ताओं और पशुपालकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
पशुपालन विभाग के कार्यों और योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उपनिदेशक पशुपालन विभाग, डॉ. नसिब सिंह जी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में श्री अरुण कौशिक जी ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों और दूर-दराज से पधारे गौशाला कार्यकर्ताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में गौशाला प्रतिनिधि, पशुपालक और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जिससे यह आयोजन गोवंश सेवा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।