हांसी:– NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्याओं, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अव्यवस्थाओं तथा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को हांसी में छात्रों ने विशाल एवं शांतिपूर्ण पैदल मार्च निकाला। मार्च के दौरान छात्रों ने दिवंगत अभ्यर्थियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। साथ ही केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई।
पैदल मार्च का नेतृत्व लवकेश सैन ने किया। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, विभिन्न पुस्तकालयों में अध्ययनरत युवा तथा जागरूक नागरिक शामिल हुए। छात्राओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।
यह मार्च डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक से शुरू होकर बड़सी गेट, उमरा गेट, जाट धर्मशाला होते हुए पुनः अंबेडकर चौक पर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में छात्रों ने तिरंगा हाथ में लेकर लोकतंत्र, शिक्षा और छात्र अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए तथा शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया।
इस दौरान लवकेश सैन ने कहा कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी लगातार मानसिक तनाव, अनिश्चितता और कथित अव्यवस्थाओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि NEET अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं बेहद दुखद और चिंताजनक हैं तथा इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की भी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रतियोगी छात्रों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं न्याय की मांग कर रहे युवाओं की आवाज़ है।
मार्च में हितेश कागड़ा, दिनेश मलिक, निशांत, सचिन, निशा, सुदेश, काजल, मन्नु, प्रिंस यादव सहित अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
छात्रों की प्रमुख मांगें:
1. NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवारों को न्याय दिया जाए।
2. प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं छात्र हितैषी बनाया जाए।
3. दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
4. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।
5. छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए तथा शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएं।
