संतोषगढ़/ऊना, 26 जून:- कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो गरीबी और कठिनाइयाँ भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। जिला ऊना के गांव सनौली की बेटी प्रवीण कुमारी इसी बात का जीता-जागता उदाहरण हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया, बल्कि दिन-रात मेहनत कर उन्हें साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रवीण कुमारी पिछले दो वर्षों से दिन के समय हिम गौरव आईटीआई, संतोषगढ़ में फिटर ट्रेड का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, जबकि रात के समय नेस्ले इंडिया में नौकरी कर अपनी पढ़ाई और जीवन-यापन का खर्च स्वयं वहन कर रही हैं। 
वर्ष 2024 से शुरू हुआ उनका यह संघर्ष अब जुलाई 2026 में दो वर्षीय प्रशिक्षण पूरा होने के साथ एक नई मंजिल की ओर बढ़ रहा है। सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि पूरी रात काम करने के बावजूद उन्होंने अपने प्रशिक्षण में 98 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई है। थकान, आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने न तो अपने लक्ष्य से समझौता किया और न ही अनुशासन छोड़ा। यही जज़्बा उन्हें अन्य विद्यार्थियों से अलग पहचान दिलाता है।
 प्रवीण कुमारी की कहानी केवल एक छात्रा की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों के आगे हार मान लेते हैं। उन्होंने साबित किया है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।
 हिम गौरव आईटीआई, संतोषगढ़ के प्रबंधक संजय जोशी और शिक्षकों ने भी उनकी लगन, अनुशासन और संघर्ष की सराहना करते हुए उन्हें संस्थान के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। आज प्रवीण कुमारी उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं जो आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने का विचार करती हैं। 
उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका डटकर सामना करते हैं।