होशियारपुर, 26 जुलाई 2026:- दरबार बापू गंगा दास, माहिलपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का पावन आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में निरंतर जारी है। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और सच्चे ज्ञान का संदेश दिया।
कथा व्यास ने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण बाल्यावस्था से आगे बढ़े तो उन्होंने समस्त ब्रजवासियों से इंद्र पूजा के स्थान पर गिरिराज गोवर्धन की पूजा करने का आह्वान किया। उन्होंने समझाया कि मनुष्य जीवन भर इंद्रियों की इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास करता है, लेकिन वे कभी संतुष्ट नहीं होतीं। इसलिए व्यक्ति को सच्चे ज्ञान के मार्ग पर चलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि नंद बाबा ने भी ब्रजवासियों को समझाया कि यदि परिवार या समाज में कोई पुरानी और गलत परंपरा चली आ रही हो, तो सही ज्ञान प्राप्त होने पर उसे त्याग देना चाहिए। इसके बाद सभी ब्रजवासी पूजा सामग्री, भोजन और अन्य आवश्यक सामान लेकर गिरिराज गोवर्धन की ओर रवाना हुए। जो लोग पैदल नहीं चल सके, वे बैलगाड़ियों, तांगों और अन्य वाहनों के माध्यम से पहुंचे। कथा व्यास ने कहा कि यदि कोई श्रद्धालु पैदल परिक्रमा करने में सक्षम न हो, तो वह किसी भी साधन से परिक्रमा कर सकता है, लेकिन श्रद्धा के साथ परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं ब्रजवासियों के साथ मिलकर गिरिराज गोवर्धन की प्रथम परिक्रमा की तथा मूंग की दाल जैसे सरल व्यंजन से लेकर विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार कर गिरिराज महाराज को अर्पित किए। इसी परंपरा के तहत कथा स्थल पर भी गिरिराज महाराज को 56 भोग अर्पित किए गए, जिसके उपरांत प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
कथा के दौरान कथा व्यास द्वारा प्रस्तुत भजन "मैं तो गोवर्धन को जाऊं, मेरे वीर नाय माने मेरा मनवा" तथा "श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहयो" ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजनों पर मुख्य सेवादार मनदीप सिंह बैंस, परमजीत सिंह बैंस (इंस्पेक्टर), अनिल कुमार, विक्की अग्निहोत्री, रवि कुमार, विक्की, पिंकी, ईशा गर्ग, मनीष तथा कथा समिति के सभी सदस्य भक्ति भाव से झूमते हुए नजर आए।
कथा समिति ने नगर एवं आसपास के सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रतिदिन शाम 6:00 बजे से आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा में अपने परिवार सहित शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। कथा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के लिए लंगर प्रसाद की भी व्यवस्था की गई है।