हिसार:- समाजसेवी स्व. चौ. फतेहचंद जी, स्व. माता हरबंस कौर जी एवं स्व. श्री विजय शर्मा जी की स्मृति में भारत माता मंदिर में आयोजित की जा रही शिव महापुराण कथा के लिए भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई। महिलाओं ने पीले व लाल वस्त्र धारण करके एवं आम के पत्तों व नारियल से सुसज्जित कलश सिर पर धारण करके एम सी कॉलोनी व डी सी कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्र में शोभा यात्रा में हिस्सा लिया। कलश यात्रा का मार्गदर्शन वृंदावन के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित कृष्ण शरण शास्त्री जी महाराज ने किया। इस दौरान जय भोले भंडारी के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। इस कलश यात्रा में आासपास के क्षेत्रों से काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
     कलश यात्रा में एम सी कॉलोनी के भारत माता मंदिर के संरक्षक अनिल महत्ता, पुजारी पंडित रामकिशोर शुक्ल, रामनिवास अग्रवाल सीए, रामबाबू सिंगल, आचार्य संतोष शास्त्री, सुनीता शर्मा, लता सिंगल, मनोरमा गुप्ता, परवीन अरोड़ा, इंदु गोयल, मधु बंसल, रेखा, बिमला कथूरिया मौजूद रहे। 
इस दौरान विवेक पाठक, वेदपाल, मास्टर मदन, जितेंद्र सोनी, अर्चना अग्रवाल, रीना गुप्ता, मीनू सिंगला, मीरा, कैलाश, कीर्ति मित्तल, प्रीति सिंगल, राधा शुक्ला, पूनम मित्तल, निशा गोयल, सुनैना सिंगला, अंजू गर्ग, माधुरी मिश्रा व सुनीता सोनी सहित भारत माता समिति एवं महिला मंडल की समस्त सदस्य उपस्थित रही।
   अनिल महता ने बताया कि 4 अप्रैल तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से सायं 7 बजे तक वृंदावन के प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित कृष्ण शरण शास्त्री श्री शिवमहापुराण कथा करेंगे। 5 अप्रैल को प्रात: हवन के उपरांत प्रात: 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
  कलश यात्रा के उपरांत भक्तों ने मंदिर में स्थापित भारत माता, श्री गंगा माता, श्री गऊ माता के साथ-साथ श्री दुर्गा माता, श्री श्याम बाबा, श्री राधा-कृष्ण, श्री राम दरबार, श्री लक्ष्मी नारायण, श्री पंचमुखी हनुमान व श्री सिद्धिविनायक गणेश के विग्रह के भी दर्शन किए। मंदिर के प्रांगण में ही स्थापित श्री शिव परिवार, श्री सिंदूरी हनुमान, श्री संतोषी माता, श्री शीतला माता एवं श्री शनि महाराज के विग्रह के समक्ष भी श्रद्धालु नतमस्तक दिखाई दिए। इनके साथ-साथ भारत माता मंदिर में संत गुरु नानक, महात्मा बुद्ध, संत महावीर, संत कबीर, संत रविदास, संत वाल्मीकि, स्वामी दयानंद सरस्वती, भगवान परशुराम व महाराजा अग्रसेन के भित्ति चित्र भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने रहे।