हिसार:- श्री आद्यशक्ति पीठ मां संतोषी आश्रम में नवरात्रों में पूजा-पाठ के साथ पूरे विधि-विधान से श्रीराम कथा व आध्यात्मिक प्रवचनों का शुभारंभ हुआ। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी संतोषी माता ने मां भगवती व प्रभु श्रीराम की आराधना करते हुए श्रीराम का सही अर्थ समझाया। उन्होंने कहा कि राम का अर्थ है जो सर्वत्र रमा हुआ है। कहने का तात्पर्य है कि जन-जन के मन में जो बसा हुआ है वही राम है। उन्होंने कहा कि नव संवत परिवर्तन का प्रतीक है। वृक्षों के पुराने पत्ते झड़ते हैं और नई कोंपलें आती हैं। सर्दी के समापन व गर्मी के आगमन का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि जैसे प्रकृति में परिवर्तन होता है, वैसे ही मानव शरीर में भी परिवर्तन होता है।
  हिसार के मॉडल टाउन में स्थित मां संतोषी आश्रम में शुरू हुई श्रीराम कथा के प्रथम दिवस कथा व्यास अनंत श्री विभूषित परम श्रद्धेय स्वामी संतोषी माता को मां संतोषी आश्रम की प्रबंधन कमेटी के उपाध्यक्ष मदनलाल गोयल ने तिलक करके अभिनंदन किया और कृष्णा गुप्ता, वीना सोनी, हेमराज यादव, अशोक वर्मा व श्रीमती नारंग ने स्वामी संतोषी माता जी को माला अर्पित करके स्वागत किया। इस अवसर पर शक्ति उपासना ट्रस्ट के महासचिव राजमल काजल, अशोक बंसल, सुभाष बंसल, राकेश नारंग, सुशील बुड़ाकिया, रमेश चुघ व अनिल महत्ता सहित समस्त पदाधिकारी व काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
  श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास स्वामी संतोषी माता ने प्रवचन में कहा कि कलियुग में भगवान का रूप नहीं दिखता तो कोई बात नहीं भगवान का नाम तो है। यदि नाम का सुमिरन होगा तो रूप को सामने आना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दरअसल नाम के अंदर ही रूप विद्यमान है। यदि भक्त के पास अपने इष्ट श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शिव या मां भगवती का नाम है तो उन्हें हर हाल में आना ही पड़ेगा। उन्होंने समझाया कि जिस समय जिह्वा यह प्रभु नाम का उच्चारण करती है तो समझो स्वयं प्रभु वहां प्रकट होते हैं। स्वामी संतोषी माता ने भक्तों को रामायण का अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा कि राम जिसमें अयन करते हैं, वही रामायण है। अयन से तात्पर्य घर से है अर्थात श्रीराम का घर रामायण को समझा जा सकता है।
   मां संतोषी आश्रम की प्रबंधक कमेटी के संयोजक राजमल काजल ने बताया कि श्री आद्यशक्ति पीठ मां संतोषी आश्रम में 27 मार्च तक प्रतिदिन प्रात: 8 बजे विधि-विधान से पूजा व दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। हरिद्वार से पधारे वैदिक विद्वान यजमानों को प्रतिदिन नियमानुसार पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करवाएंगे। उन्होंने बताया कि 27 मार्च तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से स्वामी संतोषी माता जी श्रीराम कथा का अमृतपान करवाएंगी और आध्यात्मिक प्रवचनों को सुनने का अवसर मिलेगा।