फगवाड़ा (6 जुलाई):- केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा (सेखों) रजि. के महासचिव प्रो. संधू वरियांवी और कार्यालय सचिव व प्रसिद्ध लोक शायर जगदीश राणा ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में बताया कि अध्यक्ष पवन हरचंदपुरी की अध्यक्षता और महासचिव प्रो. संधू वरियांवी के नेतृत्व में लुधियाना में सभा की एक आपातकालीन बैठक हुई। गंभीर चर्चा के बाद निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:
भाषा विभाग पंजाब और पंजाबी भाषा की मांगों के संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा एवं भाषा मंत्री और वित्त मंत्री को व्यक्तिगत पत्र लिखे जाएंगे। सभा के मांग-पत्र के अनुसार मांगों को मानने पर जोर दिया जाएगा और भाषा विभाग के गंभीर मुद्दों को हल करने के लिए दबाव बनाया जाएगा। सभा ने भाषा विभाग पंजाब के बारे में भाषा मंत्री द्वारा दिए गए बयान पर विचार किया। सभा द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को कानून बनाने के दौरान पंजाबी मातृभाषा के अनिवार्य उपयोग के लिए भी पत्र लिखा जाएगा।
पवन हरचंदपुरी ने मौजूदा मांगों के बारे में बताया कि भाषा विभाग के खात्मे को लेकर खड़ी हुई आशंकाओं को दूर किया जाए, इसके वित्तीय प्रबंधन को मजबूत किया जाए, सभी खाली पड़े पदों को भरा जाए और लेखक भवन को एनसीसी के कब्जे से तुरंत मुक्त करवाया जाए।

अन्य प्रमुख मांगें:
प्री-नर्सरी से पहली कक्षा तक पंजाबी को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए भाषा कानून में संशोधन किया जाए।
पंजाब के अंदर पुस्तकालय कानून बनाया जाए।
सख्ती से पंजाबी लागू करवाने के लिए पंजाबी भाषा ट्रिब्यूनल बनाया जाए।
पंजाब विधानसभा में बनने वाला हर कानून पंजाबी में बनाया जाए।
तुरंत भाषा सलाहकार बोर्ड का गठन करके वर्ष 2020 से लंबित छह वर्षों के पुरस्कारों की घोषणा की जाए।
पुस्तकों को वित्तीय सहायता दी जाए और पड़े हुए पांडुलिपियों को छपवाया जाए।
गरीब लेखकों को साहित्यिक पेंशन दी जाए।
हरियाणा की तरह लेखकों को मुफ्त बस सुविधा दी जाए।
पहले दिए गए पुरस्कारों के कोर्ट केस का जल्द फैसला करवाया जाए और केंद्रीय सभा के मांग-पत्र पर बैठक बुलाकर सभी मसलों का निपटारा किया जाए।

इस चर्चा में पवन हरचंदपुरी और संधू वरियांवी के अलावा डॉ. जोगिंदर सिंह निराला, डॉ. गुरचरन कौर कोचर, अमरजीत शेरपुरी, सुरिंदर पाल शर्मा, सुखचैन थांदेवाल, जगदीश राणा, अमरीक सिंह तलवंडी, सुरिंदर सागर, गुलजार सिंह सौंकी, सुखदेव सिंह औलख, जसविंदर सिंह जस्सी, नक्काश चिट्टीवाणी, कृष्ण लाल फरीदकोट, के. साधु सिंह, कुलवंत बूंगा, अमरजीत अमन, दर्शन सिंह प्रीतीमान और मुख्तियार सिंह बंगड़ आदि शामिल थे।