चण्डीगढ़:- स्थानीय अदालत ने सेक्टर-22 निवासी वरिष्ठ नागरिक मंगत राम को चेक बाउंस मामले में बरी कर दिया। यह मामला धारा 138, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता राजीव कुमार शर्मा, निवासी सेक्टर-44, चंडीगढ़, ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उन्होंने मंगत राम को ऋण दिया था और उसी के निर्वहन के लिए विवादित चेक जारी किए गए।
मगर मंगत राम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता दानिश्वर अली और मो. उज़ै़र ने अदालत को बताया कि मंगत राम ने शिकायतकर्ता से कोई ऋण नहीं लिया था। उनके अनुसार, संबंधित चेक व्यापारिक उद्देश्यों के लिए दिए गए थे, जिनका शिकायतकर्ता ने बाद में दुरुपयोग किया।
वकीलों ने यह भी दलील दी कि शिकायतकर्ता के कथित बेईमान आचरण की जानकारी होने पर मंगत राम ने बैंक से अपना धन वापस निकाल लिया था।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई रसीद या दस्तावेज़ नहीं है, जिससे यह सिद्ध होता हो कि शिकायतकर्ता ने आरोपी को कोई रकम उधार दी थी। साथ ही, शिकायतकर्ता ने आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं किया, जिससे धन के स्रोत की पुष्टि हो सके।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जेएमआईसी दिव्या शर्मा की अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता कानूनी देनदारी के अस्तित्व और देनदारी के निर्वहन के लिए चेक जारी होने का तथ्य सिद्ध करने में विफल रहा है। अदालत ने पाया कि धारा 138 के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते। अतः आरोपी मंगत राम को आरोपों से बरी कर दिया गया।
चेक बाउंस मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा तथ्य नहीं सिद्ध कर पाने से कथित आरोपी वरिष्ठ नागरिक बरी
