हांसी, 5 अक्तूबर (दिनकर गावड़ी):- फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा किसानों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय एवं कृषि संबंधी नुकसान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सोमवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा गांव जमावड़ी में जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। कैंप में बतौर मुख्य अतिथि एसडीएम राजेश खोथ द्वारा किसानों को फसल अवशेषों के इन-सीटू एवं एक्स-सीटू प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई तथा फसल अवशेषों को न जलाकर वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित करने का आह्वान किया गया।

अधिकारियों ने किसानों से संवाद करते हुए फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों, कृषि यंत्रों तथा इनके प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी साझा की।

एसडीएम राजेश खोथ ने किसानों का आह्वान किया कि वे फसल अवशेषों को किसी भी परिस्थिति में न जलाएं और उपलब्ध वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए पराली का उचित प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से वातावरण में धुआं एवं हानिकारक गैसें फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा खेत में पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव एवं पोषक तत्व भी प्रभावित होते हैं।

इन-सीटू प्रबंधन की तकनीकों की दी जानकारी

कैंप के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में विस्तार से समझाया। किसानों को बताया गया कि फसल अवशेषों को खेत में ही उचित कृषि यंत्रों की सहायता से काटकर, बारीक कर मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे खेत की मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है और उसकी उर्वरता एवं संरचना को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर, रोटावेटर सहित अन्य कृषि यंत्रों के उचित एवं प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से किसान पराली को जलाने के बजाय खेत में ही उसका उपयोग कर सकते हैं और आगामी फसल की बुवाई भी समय पर कर सकते हैं।

एक्स-सीटू प्रबंधन से पराली का उपयोगी निस्तारण

एसडीएम ने एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में भी किसानों को जागरूक किया। किसानों को बताया गया कि फसल अवशेषों को खेत से बाहर निकालकर उनका उचित संग्रहण किया जा सकता है तथा विभिन्न उपयोगी गतिविधियों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पराली को आग लगाने की आवश्यकता नहीं रहती और फसल अवशेष एक उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कैंप में डॉ. वाईके सक्सेना, एसडीएओ डॉ. रविंद्र, विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रीति वर्मा, एएई गोपी राम, विषय विशेषज्ञ डॉ. रॉबिन, बीएओ डॉ. रूपेश सहित कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करने से एक ओर जहां वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता, जैविक गुणवत्ता एवं जल धारण क्षमता को बनाए रखने में भी सहायता मिलती है। किसानों को विभाग एवं सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों और कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

किसानों से पराली न जलाने की अपील

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं, फसल अवशेषों का वैज्ञानिक एवं उचित प्रबंधन अपनाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। अधिकारियों ने कहा कि फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन केवल प्रदूषण रोकने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह खेत की मिट्टी को स्वस्थ रखने और खेती की लागत को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

जागरूकता कैंप के आयोजन में संबंधित संस्था के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। संस्था के प्रतिनिधियों ने किसानों तक फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी पहुंचाने तथा कैंप को सफल बनाने में कृषि विभाग का सहयोग किया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों का आह्वान किया कि वे सामूहिक प्रयासों से पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करने में सहयोग दें और स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ मिट्टी तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।