फतेहाबाद, 2 मार्च:- ठाकर बस्ती स्थित एसएस जैन सभा में ‘होली-चतुर्मासी महापर्व’ के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आगम के प्रकाण्ड ज्ञाता, योगीराज, परम पूज्य गुरुदेव श्री अरुणचन्द्र जी महाराज ने जीवन सुधार और आध्यात्मिक शुद्धि का संदेश दिया। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
गुरु महाराज ने अपने प्रवचनों में फरमाया कि चतुर्मासी का पर्व उन लोगों के लिए विशेष है जो शाकाहारी हैं और जो अपना कल्याण कर बुराइयों से मुक्त होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हर चार महीने में आने वाला यह त्योहार आत्म-निरीक्षण का दिन है। इस दिन हमें यह आकलन करना चाहिए कि गत चार मास में हमने आध्यात्मिक रूप से क्या पाया और क्या गंवाया है। 
उन्होंने फरमाया कि यहां धन-दौलत के लाभ की बात नहीं हो रही, अपितु यह जानने योग्य है कि हमारे भीतर विकारों की कितनी गांठें कम हुई हैं? वे पहले से बढ़ी हैं या घटी हैं, इसका हिसाब लगाना ही सच्ची चतुर्मासी है। होली के पर्व का मधुर संदेश देते हुए गुरुदेव ने कहा कि ‘होली सो होली’, अर्थात जो भूतकाल में हो गया उसे भुलाकर आज नई शुरुआत करें। पिछली बातों पर कांटा लगाकर मन को हल्का कर लेना चाहिए। 
उन्होंने आह्वान किया कि जिनसे भी आपकी अनबन या मनमुटाव है, उनसे आज हृदय से क्षमायाचना कर लें और निडर होकर ‘आई एम वैरी सॉरी’ कहें। गुरुदेव ने होली मनाने के तरीके पर मार्गदर्शन देते हुए दो मुख्य बातों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल है तो कल है। पानी को व्यर्थ न गंवाएं और सूखे रंगों (गुलाल) के साथ तिलक लगाकर उत्सव मनाएं। मादक पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक है।
 पर्व मनाते समय अपनी सेहत का ख्याल रखें और नशे से पूरी तरह दूर रहकर ‘शुद्ध होली’ मनाएं। प्रवचन के अंत में गुरुदेव ने सभी को प्रेम और भाईचारे के साथ सादगीपूर्ण तरीके से त्योहार मनाने का आशीर्वाद दिया।