बठिंडा, 21 जुलाई 2026:- राष्ट्रीय स्तर पर बेशक नीट से संबंधित कथित घपले का मामला गूंज रहा है पर विजिलेंस पंजाब में हुए ऐसे ही मामले की थाह लेने में असफल रही है। मामला पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड द्वारा ग्रुप-बी की असामियों संबंधी भर्ती परीक्षा की मेरिट सूची में हुए कथित घपले का है। नतीजा आने के छह महीने बाद भी अधिकारी जांच करने की बात कह रहे हैं। पंजाब सरकार ने मामले की पड़ताल के लिए एक डीएसपी की अगुवाई में 4 मेंबरी एसआईटी बनाई थी। इस हाईप्रोफाइल जांच के आधे में लटके होने के कारण बेरोजगारों में निराशा पाई जा रही है। यह सारा विवाद नायब तहसीलदार, जिला खजाना अफसर, खजाना अफसर, सीनियर सहायक और सीनियर सहायक-कम-इंस्पेक्टर जैसी 408 असामियों की भर्ती के लिए पिछले साल 21 दिसंबर को लिखित परीक्षा से संबंधित है।
इस भर्ती परीक्षा का नतीजा 9 जनवरी 2026 को घोषित किया गया था जिसके तुरंत बाद कथित घपला होने की बात उठनी शुरू हो गई थी। इस परीक्षा के दौरान गड़बड़ी का शक तब गहराया जब बठिंडा के एक परीक्षा केंद्र में उम्मीदवारों को बांटे गए प्रश्न पत्रों पर 'करेक्शन फ्लूड' (सफेदा) लगा हुआ पाया गया था। तब उम्मीदवारों ने आरोप लगाया था कि पेपर बांटने से पहले ही उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। विवाद तब और भड़क गया जब घोषित किए गए नतीजों में पहले 100 सफल उम्मीदवारों में से 22 अकेले बठिंडा जिले से संबंधित सामने आए थे। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस सूची में एक विवाहित जोड़ा, दो सगे भाई-बहन और दो चचेरे भाई-बहन भी थे, जिसने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए थे।
नतीजे के अनुसार पहले और दूसरे स्थान पर आए परीक्षार्थियों के 120 में से एक जैसे 117.50 नंबर थे जबकि चौथे स्थान पर एक लड़की ने 116.25 और पांचवें नंबर वाले के 115 अंक थे। छठा स्थान 106.75 अंकों के साथ परीक्षार्थी का है जबकि 101.25 अंकों वाला सातवें स्थान पर आया था। बठिंडा की विभिन्न लाइब्रेरियों में तैयारी करने वाले इन नौजवानों का कहना था कि उन्होंने ऐसा नतीजा पहले कभी भी नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि वे पिछले कई सालों से मुकाबले की परीक्षाओं ग्रुप बी, ग्रुप सी, सिविल सर्विस, पीसीएस और आईएएस के लिए तैयारी कर रहे हैं पर उनके अंकों का आंकड़ा 80 से 100 तक ही पहुंच सका है। उन्होंने कहा कि बठिंडा भर्ती परीक्षा के नतीजे पर नजर मारें तो पारदर्शिता शक के घेरे में है।
इस मौके पंजाब के करीब एक लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी। पीड़ित नौजवानों ने इस कथित घोटाले की जांच जल्द से जल्द पूरी करके दोषियों को बेनकाब और परीक्षा दोबारा करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस कथित पेपर लीक के कारण पूरे मेहनती नौजवानों का भविष्य धुंधला हो गया है। उम्मीदवारों द्वारा भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद बोर्ड ने इस साल जनवरी में विजिलेंस को जांच के लिए पत्र लिखा था। इंसाफ की मांग कर रहे नौजवानों ने बताया कि उन्होंने कई सियासतदानों, विधायकों और उच्च अधिकारियों के पास फरियाद की थी पर किसी ने उनकी बांह नहीं पकड़ी। उन्होंने बताया कि इसके बाद यह मामला मुख्यमंत्री भगवंत मान के ध्यान में लाया गया, जिन्होंने नौजवानों को निष्पक्ष जांच करवाने का पूरा भरोसा दिया था।
जांच जारी: डीएसपी विजिलेंस
मामले की जांच कर रहे श्री मुक्तसर साहिब के डी.एस.पी. विजिलेंस अमनदीप सिंह का सिर्फ इतना ही कहना था कि मामले की अभी पड़ताल चल रही है।

**पंजाब का इतिहास घपले
पंजाब में यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि कई साल पहले गठजोड़ सरकार के दौरान भी कथित नौकरी घोटाला हुआ था। इस मौके सामने आया था कि सौ से अधिक उम्मीदवारों ने लाखों रुपये चढ़ाकर नौकरियां हासिल की हैं। पंजाब सरकार के कई महकमों में की गई भर्ती संबंधी पुलिस ने मलोट के एक अकाली नेता समेत अन्य सूबों से भी गिरफ्तारियां की थीं। मामले में बठिंडा जिले का एक अकाली नेता भी नामजद किया गया था और तलवंडी साबो के भाजपा नेता के लड़कों से पूछताछ की गई थी। तब लखनऊ के गुरु जी के तौर पर जाने जाने वाले व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई थी। बाद में इस मामले का क्या बना इस बारे कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।