चंडीगढ़, 22 अक्तूबर (गुरजीत बिल्ला):- रयात बाहरा यूनिवर्सिटी (आरबीयू) द्वारा इंडस्ट्री-स्किल इनोवेशन एंड एम्प्लॉयबिलिटी कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। इसमें उद्योग जगत के विशेषज्ञों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों और अकादमिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करना तथा विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता और करियर की संभावनाओं को बेहतर बनाना था। इसका आयोजन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ साइंसेज और यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ स्किल एनहांसमेंट ने संयुक्त रूप से किया।

कॉन्क्लेव की संयोजक और डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. (डॉ.) सिमरजीत कौर ने बताया कि कार्यक्रम में फार्मास्यूटिकल्स, बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, उद्यमिता और मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों से जुड़े 14 विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें अरिस्टो फार्मास्यूटिकल्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जावेद इमाम; एक्सोटिका आईटी सॉल्यूशंस के संस्थापक एवं सीईओ गौरव वत्स; क्रिएटिव चॉकलेट्स के संस्थापक बलप्रीत सिंह सहगल; बायोएज टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के एमडी डॉ. शशि कुमार राणा; एनपैरिस बायो प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक निदेशक एवं सीईओ डॉ. सुधीर कुमार शर्मा; ग्लोबल एपियरीज के संस्थापक एवं निदेशक मदन शर्मा; और सीएसआईआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़ की वैज्ञानिक-एफ डॉ. सुमन सिंह शामिल थे।

अन्य प्रतिभागियों में एम.बी. मशीनरी कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग पार्टनर हरदीप ममरत; इंटीग्रम आईपी की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. श्वेता सेन थलवाल; रैप्चर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक एवं निदेशक डॉ. कविता राणा; तथा नेशनल करियर सर्विस की यंग प्रोफेशनल रोजी सिंगला सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।

कॉन्क्लेव का मुख्य आकर्षण “कौशल, नवाचार और रोजगार क्षमता” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही। इसमें उद्योग की बदलती जरूरतों, तकनीकी प्रगति, उद्यमिता, नए करियर अवसरों और पेशेवर सफलता के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशलों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण, संचार कौशल, नवाचार और बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कौशल की कमी को दूर करने के लिए उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कॉन्क्लेव के मुख्य संरक्षक और यूनिवर्सिटी के चांसलर सरदार गुरविंदर सिंह बाहरा ने उद्योग की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता दोहराई। वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को उद्योग विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और करियर के नए अवसरों को समझने का मौका देते हैं। इस अवसर पर प्रो-वाइस चांसलर डॉ. सतीश कुमार भी मौजूद थे। डीन स्टूडेंट वेलफेयर और कॉन्क्लेव की संयोजक प्रो. (डॉ.) सिमरजीत कौर ने नवाचार, उद्यमिता और पेशेवर विकास को बढ़ावा देने के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी को लगातार मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

कॉन्क्लेव का समापन संस्थागत साझेदारी मजबूत करने, कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के संकल्प के साथ हुआ।