चंडीगढ़, 22 अक्तूबर:- हरियाणा के सहकारिता, पुरातत्व, पर्यटन एवं संग्रहालय मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थलों में शामिल ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राखीगढ़ी में आधुनिक संग्रहालय परिसर का काम जल्द पूरा किया जाएगा और शेष कार्य के लिए 180 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इस परियोजना से राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत को नया स्वरूप मिलेगा और यह स्थल पुरातात्विक अनुसंधान, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा।
पुरातत्व, पर्यटन एवं संग्रहालय मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा राखीगढ़ी महोत्सव के तहत आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी भारत की प्राचीन सभ्यता, वैज्ञानिक सोच, विकसित शहरी नियोजन और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहां की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने, पुरातात्विक खोजों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा देश-विदेश में इसकी पहचान बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
आधुनिक संग्रहालय में प्रदर्शित होगी गौरवशाली विरासत
पर्यटन, पुरातत्व एवं संग्रहालय मंत्री ने बताया कि 180 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला आधुनिक संग्रहालय परिसर राखीगढ़ी के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही एक ऑडिटोरियम का निर्माण भी किया जाएगा, जहां ऐतिहासिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। आधुनिक संग्रहालय के माध्यम से यहां मिले पुरातात्विक अवशेषों और प्राचीन सभ्यता से जुड़े तथ्यों को व्यवस्थित एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय विद्यार्थियों, शोधार्थियों, इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए ज्ञानवर्धक केंद्र के रूप में काम करेगा। इससे लोगों को हड़प्पा सभ्यता की जीवनशैली, सामाजिक व्यवस्था, शिल्पकला, कृषि, आवासीय संरचना और शहरी नियोजन को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए राखीगढ़ी में विश्राम गृह का निर्माण कार्य भी पूरा किया जा चुका है।
पुरातात्विक खोजों से प्राचीन सभ्यता के विकास की मिलती है जानकारी
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी में हुई खुदाई से प्राचीन समाज की विकसित जीवनशैली और व्यवस्थित सामाजिक संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आए हैं। यहां प्राप्त पुरातात्विक अवशेष भारतीय इतिहास को समझने और प्राचीन सभ्यताओं के विकास का अध्ययन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस विरासत का संरक्षण केवल ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी है। आधुनिक संग्रहालय परिसर बनने से इन महत्वपूर्ण खोजों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा और राखीगढ़ी को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर
पुरातत्व, पर्यटन एवं संग्रहालय मंत्री ने कहा कि राखीगढ़ी में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन को बढ़ावा देने से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, स्वरोजगार, हस्तशिल्प और अन्य आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। संग्रहालय और ऑडिटोरियम के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक सम्मेलनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पुरातात्विक गतिविधियों के आयोजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य विरासत का संरक्षण करने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय विकास को गति प्रदान करना है।
इस अवसर पर सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कुमार, पद्मश्री डॉ. आर.एस. बिष्ट, उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. अमरिंदर नाथ, डॉ. गरिमा सिंह सहित अन्य पुरातत्वविदों ने हड़प्पा कालीन समृद्ध संस्कृति के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
